Monday, Nov 18, 2019
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जानें नाबालिग होते हुए कैसे जीते भगवान राम अपना केस, किस वकील मित्र की ली मदद ?

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/सौरभ बघेल। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (ram janmabhoomi babri masjid dispute) में शनिवार को सु्प्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया है। 5 जजों की पीठ ने सर्व-सहमति से फैसला सुनाते हुए रामलला विराजमान के हक में फैसला दिया है। कोर्ट ने इस पूरे विवाद में निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या (Ayodhya) में 5 एकड़ जमीन देने को भी कहा है। इस पूरे मामले में कोर्ट ने भगवान राम को नाबालिग मानते हुए उनका पक्ष रखने की अनुमति उनके मित्र को दी थी जिनकी बदौलत आज यह फैसला आया है। आइए हम आपको बताते हैं कि कौन हैं वह मित्र और कोर्ट ने भगवान राम को क्यों माना नाबालिग ?  

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क्यों कहा कहा नाबालिग
बता दें रामलला विराजमान से आशय स्वयं भगवान राम की स्थापित मूर्ति से है। हिन्दू मान्यताओं में भगवान की मूर्ति को जीवित माना जाता है। इसी आधार पर इलाहबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने पहली बार 1 जुलाई 1989 को रामलला विराजमान को इस पूरे मामले में पक्षकार माना था। कोर्ट ने इस मामले में भगवान राम को नाबालिग मानकर उनके मित्र के तौर पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वकील देवकीनंदन अग्रवाल (Devkinandan Agrwal) को उनका केस लड़ने का मौका दिया था। वर्तमान में रामलला के उसी केस को सुप्रीम कोर्ट में देवकीनंदन के बाद वरिष्ठ वकील पाराशरण ने पैरवी की है और केस को जीता है। 
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किस कानून के तहत भगवान राम ने लड़ा अपना केस

बता दें कि हिंदू मान्यताओं में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को जीवित इकाई माना गया है। इसके अलाावा बता दें कि न्याय प्रकिया का धारा 32 भी विराजमान ईश्वर को जीवित ईकाई मानती है इसलिए कोर्ट ने उसे अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार दिया था। इसलिए कोर्ट ने इसे नाबालिग माना गया है।

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राम लला विराजमान पर क्या बोले न्यायधीश 
सुप्रीम कोर्ट में जब राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई चल रही थी तब रंजन गोगोई (Rajan Gogoi) की पीठ ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे खुदाई में मिला ढांचा गैर-इस्लामिक था। कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े को पक्षकार न मानकर रामलला विराजमान को पक्षकार माना था।

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