Tuesday, Nov 12, 2019
ayodhya dispute cji said faith is not a matter of land do not tell religious texts give evidence

अयोध्या विवाद: CJI बोले-आस्था नहीं जमीन का केस, धर्म ग्रंथ न सुनाएं, दें सबूत

  • Updated on 8/22/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अयोध्या (Ayodhya) के राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Mosque)  जमीन विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष बुधवार को हुई। इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील से कहा कि वह इस मामले में पुख्ता सबूत पेश करें और सिर्फ पुराणों और अन्य धर्म ग्रंथों की कहानी न सुनाएं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला किसी आस्था का नहीं बल्कि विवादित जमीन से जुड़ा है। 

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हम आस्था को लेकर लगातार दलीलें सुन रहे हैं जिन पर हाईकोर्ट ने विश्वास भी जताया है। इस पर जो भी स्पष्ट साक्ष्य हैं वे बताएं। सी.जे.आई. ने कहा कि मानचित्र में यह साफ करिए कि मूर्तियां कहां हैं? इससे पहले रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पी.एन. मिश्रा ने स्कंद पुराण का जिक्र किया, जिसमें लोग सरयू नदी में स्नान करने के बाद जन्मस्थान के दर्शन करते थे।

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इसमें मंदिर का जिक्र नहीं है, लेकिन जन्मस्थान के दर्शन करते थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि स्कंद पुराण कब लिखा गया था? राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पी.एन. मिश्रा ने कहा कि ब्रिटिश लेखक के अनुसार गुप्तवंश के समय में लिखा गया। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि बाबर ने वहां कभी कोई मस्जिद नहीं बनवाई और हिन्दू उस स्थान पर हमेशा से पूजा करते रहे हैं। 

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नाबालिग होते हैं भगवान

9वें दिन  रामलला विराजमान के वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दलील दी कि कानून की तय स्थिति में भगवान हमेशा नाबालिग होते हैं और नाबालिग की संपत्ति न तो छीनी जा सकती है और न ही उस पर प्रतिकूल कब्जे का दावा किया जा सकता है। वैद्यनाथन ने दलील दी कि कब्जा करके ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता। 

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