Monday, Nov 18, 2019
ayodhya dispute the story of 400 years

अयोध्या विवाद पर देश को फैसले का इंतजार, जानें- 400 साल की पूरी कहानी

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। अयोध्या मामले (Ayodhya dispute) में 40 दिन तक चली सुनवाई पूरी होने के बाद आज फैसला आने वाला है। जस्टिस रंजन गगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच जजों की सवैधानिक बेंच आज अपना फैसला सुनाएगी। सुबह 10:30 बजे इस केस पर फैसला सुनाया जाएगा तो उससे पहले आईये जानते हैं क्या आखिर कैसे और कब शुरू हुआ ये विवाद और क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी।

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विवाद की नींव 400 साल पुरानी
अयोध्या मामला देश में चलने वाले सबसे लंबे मामलों में से एक है जिसकी नींव करीब 400 साल पहले पड़ी थी। जब वहां मस्जिद का निर्माण करवाया गया। 1528 में मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में मस्जिद का निर्माण उसी भूमि पर कराया था, जिसको लेकर वर्तमान समय में विवाद चल रहा है। इस मस्जिद को लेकर हिंदुओं का दावा है कि ये जगह राम की जन्मभूमि है और यहां पहले एक मंदिर था। 

अयोध्या में इस भूमि को लेकर पहली बार 1853 में इस जगह के आसपास दंगे हुए। यहां के विवाद को देखते हुए 1859 में अंग्रेजी सरकार ने मस्जिद के आसपास बाड़ लगवा दी, और मुसलमानों को ढ़ांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई।

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राम लला की मूर्ति मिलने से भड़का मामला
23 दिसंबर 1949 को जब भगवान राम के बाल अवतार की मूर्ती मस्जिद के अंदर पाई गई तब से विवाद ने व्यापक रूप ले लिया। भगवान राम की मूर्ति मिलने पर हिंदुओं का कहना था कि भगवान वहां प्रकट हुए हैं। वहीं मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दी। 

जिसके बाद यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया लेकिन वहां के जिला मैजिस्ट्रेट के. के नायर ने ऐसा नहीं किया। उनका कहना था कि इससे दंगे और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने का डर है। जिसके बाद सरकार ने उसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया।

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सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मूर्ति हटाने के लिए कोर्ट में दाखिल की अर्जी
ढांचे में ताला लगने के बाद 1950 में फैजा सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई, एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई, और फिर 1959 में निर्मोही अखाड़े ने तीसरी अर्जी दखिल की। फिर 1661 में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर विवादित जगह से पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की। वहां से कोर्ट में अयोध्या विवाद की शुरूआत हो गई।

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1992 में भड़के दंगे
1984 में विश्व हिंदू परिषद ने विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए एक कमिटी गठित किया गया। 1986 में यू. सी. पांडे की याचिका पर फैसला सुनाते हुए फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी और ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया। फिर 6 दिसंबर 1992 में बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को कुछ ही समय में ढेर कर दिया। ढांचा गिराये जाने के बाद देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़क गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। ये बहुत दुखद घटना थी। 

इसके बाद देश में दंगे और भड़के और 2002 में गोधरा में हिंदू कार्यकर्ताओं को ले जा रही ट्रेन को आग लगा दी गई। उस घटना में 58 लोगों की मौत हो गई थी जिसके कारण और दंगे हुए और उसमें भी दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

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2011 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जगह को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया। जिसमें सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर हिस्सों का बंटवारा शामिल था। और फिर 2011 में सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद इलाहाबाद कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई गई। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेताओं पर आपराधिक मामले फिर से बहाल किए, और कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया।

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मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में विफल रहा
अयोध्या मामले के कई साल बीत जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च 2019 को मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा और सुनवाई के लिए नियुक्त पैनल को आठ सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा। जिसमें 1 अगस्त को मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसपर कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में विफल रहा।

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आज आएगा फैसला
400 साल पहले शुरू हुई इस कहानी पर आखिरकार आज सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने वाली है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर जगह सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही जस्टिस रंजन गगोई को भी जेड प्लस सिक्योरिटी दी गई है और बाकी सभी जजों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। लोगों से अपील की जा रही है कि कोर्ट के फैसले के बाद सभी शांति बनाए रखें।

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