Tuesday, Dec 10, 2019
ayodhya ram temple case sc seeks cognizance on discrepancy in translation of documents

अयोध्या प्रकरण: SC ने दस्तावेजों के अनुवाद में विसंगतियों की याचिका लिया संज्ञान

  • Updated on 7/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के राजनीतिक नजर से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के दस्तावेजों के अनुवाद में कथित विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने वाली अर्जी का बृहस्पतिवार को संज्ञान लिया। इस विवाद में मूल वादियों में एम सिदीक (अब दिवंगत) के प्रतिनिधियों ने अंतिम सुनवाई के दौरान इन विसंगतियों की ओर ध्यान आर्किषत करने की अनुमति चाही है।

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दायर इस अर्जी में न्यायिक रिकार्ड के अनुवाद में कथित रूप से ‘गंभीर त्रुटियों’ की एक सूची शामिल हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘आवेदन रिकार्ड पर लिया गया और इसमें किये गये अनुरोध की छूट प्रदान की गयी। तद्नुसार आवेदन का निस्तारण किया जाता है।’’ 

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संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूॢत एस ए बोबडे, न्यायमूॢत धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूॢत अशोक भूषण और न्यायमूॢत एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इस बीच, न्यायालय ने इस विवाद का समाधान खोजने के लिये गठित मध्यस्थता समिति को अपनी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति देते हुये उसे इसके नतीजे से एक अगस्त तक अवगत कराने का निर्देश दिया।

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एम सिद्दीक ने अधिवक्ता एजाज मकबूल के माध्यम से दायर आवेदन में हिन्दी में दी गयी गवाही के अंशों का विवरण तैयार किया है और आरोप लगाया है कि गवाही से अनुवाद गायब है। आवेदन में कहा गया है कि अपेक्षा की जाती है कि इन दस्तावेजों का अनुवाद विश्वसनीय होगा। आवेदन में इस मामले में मोहम्मद हाशिम, अब्दुल रहमान, हाजी महबूब अहमद, फारूक अहमद, मोहम्मद यासीन और अन्य गवाहों की गवाही के अनूदित अंश में विसंगतियां हैं। 

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आवेदन में उप्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये गवाहों के अनुवाद, जो उर्दू में थे, और अंग्रेजी में उनके दस्तोवजों के अनुवाद के अंश भी दिये गये हैं। अधिवक्ता कमलेश मिश्रा द्वारा दाखिल अनूदित दस्तावेज, जिनमें कथित रूप से विसंगतियां हैं, में विवादित स्थल, बाबरी मस्जिद, वहां होने वाली नमाज, अयोध्या के हिन्दू-मुस्लिम निवासियों के बीच तनाव आदि के बारे में गवाहों के बयान सम्मिलित हैं।

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