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ayushman bharat waiting increasing in delhi aiims beneficiary coming others states

आयुष्मान भारत पर वेटिंग का अड़ंगा, एम्स आ रहे हैं दूसरे राज्यों के लाभार्थी

  • Updated on 2/15/2020

नई दिल्ली/अंकुर शुक्ला। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat) के कई लाभार्थी दोहरी परेशानी का सामना कर रहे हैं। पहले तो उन्हें अपने राज्य में उपचार नहीं मिलता फिर जब वह देश के सबसे बड़े अस्पताल और शोध संस्थान एम्स पहुंचते हैं तो यहां भी उनकी उम्मीद धराशाई हो जाती है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निवासी रामकिशोर गुप्ता के जरिए सामने आया है जो स्थानीय स्तर पर उपचार नहीं मिलने की वजह से नई दिल्ली एम्स पहुंचा लेकिन महज एक जांच के लिए ही एम्स ने उसे अप्रैल 2021 की लंबी वेटिंग थमाकर उसके हौसले को तोड़ दिया। 

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मरीज के बेटे अभिनव गुप्ता के मुताबिक वह अपने पिता के उपचार के लिए बरेली स्थित निजी अस्पतालों में भी गए लेकिन सभी अस्पतालों के डॉक्टर ने उन्हें एम्स नई दिल्ली जाने की सलाह दी। जब मरीज आयुष्मान भारत के तहत गंगाराम अस्पताल पहुंचा तो उसे भर्ती होने के बाद ही जांच करने की बात कही गई। मरीज को एमआरआई जांच के पहले करीब 9 हजार रुपए की अन्य जांच कराने का मशवरा दिया गया। इसके बाद मरीज इंडियन स्पानल इंजरी सेंटर पहुंचा लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली। हैरानी की बात यह है कि मरीज के पास आयुष्मान भारत का गोल्डन कार्ड और अंत्योदय का भी लाभार्थी है बावजूद इसके मरीज उपचार के लिए भटक रहा है। 

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उपचार के अभाव में नहीं लग रहा बीमारी का पता: मरीज को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज के बेटे के मुताबिक उनकी रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या है। जिसके कारण एम्स के डॉक्टरों ने तत्काल एमआरआई कराने की सलाह दी थी। अब एमआरआई कराने में उन्हें उलझनों का सामना करना पड़ रहा है।

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बिना भर्ती हुए अगर नहीं होगी जांच तो उपचार कैसे होगा शुरू
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि आयुष्मान भारत बेशक आर्थिक रूप से लाचार लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य योजना है लेकिन इसमें तकनीकी खामियां उजागर हो रही है। ध्यान देने की बात यह है कि इन खामियों के उजागर होने के बावजूद इन्हें दूर करने की दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाया जा रहा है।

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यहां बता दें कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उन्हीं मरीजों को उपचार लेने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की अनिवार्यता है। जबकि, मरीज की बीमारी का पता लगाने के लिए पहले कई जांच करनी पड़ती है। इन जांचों में से कई बेहद महंगे होते हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल पर मरीजों की तादाद का इस कदर अभाव है कि मरीजों को तत्काल भर्ती करना संभव नहीं हो पाता। 

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सीजीएचएस की तर्ज पर मरीजों को मिल सकती है राहत 
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर के मुताबिक, सरकार अगर चाहे तो इस तकनीकी खामी को भी दूर कर सकती है। इसके लिए सीजीएचएस की तर्ज पर मिलने वाली सुविधाओं को आयुष्मान भारत से जोड़ा जा सकता है। सीजीएचएस की तरह ही आयुष्मान भारत लाभार्थी किसी भी पैनल अस्पताल से जांच कराएं तो उसे बाद में रिइंबर्स किया जा सकता है। 

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