Thursday, Mar 04, 2021
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‘कोरोना किट’ पर बाबा रामदेव के दावे में क्‍यों नहीं है दम, जानिए मुख्य वजह...

  • Updated on 6/26/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बाबा रामदेव ने पतंजलि की ओर से कोरोना की दवा ‘कोरोनिल’ कोरोना किट को लॉन्च किया और दावा किया कि ये दवा कोरोना को 100% खत्म कर देगी। उन्होंने ये भी कहा कि 7 दिन में 100% मरीज ठीक हो जाएंगे। लेकिन उनकी ये दवा लॉन्चिंग के बाद से ही विवादों में घिर गई है।

बाबा रामदेव न जिसे दुनिया की पहली कोरोना की दवा कह कर लॉन्च किया उस पर सरकार ने भी नाराजगी जताई और उन्हें विज्ञापन न करने और मंत्रालय को जानकारी देने के लिए कहा।

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अपने ही दावे पर फंसे
दरअसल, भले ही बाबा रामदेव ने दवा को बनाया लेकिन उन्होंने जिस तेजी से इसे बाजार में लाने के बारे में सोचा और जितना बड़ा रामदेव ने दावा किया वो अपने आप में ही इस दवा को लेकर शक पैदा करता है। कोरोना संक्रमित मरीजों को ठीक करने का दावा दुनिया का कोई भी वैज्ञानिक अभी तक नहीं कर पाया है और कोरोना जैसी वायरस जनित बीमारी के लिए आयुर्वेद का 100% इलाज किसी के भी गले नहीं उतर रहा है।

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100% रिकवरी पर शक
रामदेव ने दवा को लांच करते हुए कहा कि ट्रायल में कोरोनिल को 100% रिकवरी के सफल परिणाम मिले हैं। उन्होंने ये भी कहा कि 7 दिन में 100% मरीज ठीक हो गये। यहीं वो मात खा गये। दरअसल, किसी भी दवा को लेकर 100% के रिजल्ट आने को कहना शक पैदा करता हैं। वो भी तक जब रामदेव ने मात्र 280 लोगों पर इस दवा को टेस्ट किया है।

हालांकि इसके अभी तक प्रमाण नही मिले हैं। लेकिन कुछ लोगों के टेस्ट के आधार पर इसे 100% सफल कैसे कहा जा सकता है वो भी कोरोना जैसे महामारी के लिए, जिसके लिए दुनियाभर के डॉक्टर्स रात-दिन परीक्षणों में लगे हुए हैं।

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डॉ तोमर का बदला बयान
वहीँ, सबसे बड़ी बात ये भी सामने आई है कि इस दवा के परिक्षण और ट्रायल से से जुड़े निम्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ बलबीर तोमर ने कहा कि उन्हें नहीं पता बाबा रामदेव ने कैसे इसे कोरोना दवा बना दिया जबकि मुझे इम्युनिटी बढ़ाने की दवा के बारे में बताया गया था, खुद मेरे पास इसकी फाइंडिंग भी 2 दिन पहले आई हैं।

वहीँ, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विभाग ने भी कहा कि उनसे सिर्फ सर्दी खांसी-बुखार की दवा बनाने को लेकर लाइसेंस मांगा गया था। आखिर उन्हें परमिशन किसने दी?

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गंभीर मरीजों नहीं किया गया शामिल
जानकारी के अनुसार पतंजलि फार्मसी ने कोरोना परीक्षण के लिए मरीजों की संख्‍या न सिर्फ कम रखी, बल्‍कि कोरोना के गंभीर मरीजों को परीक्षण में शामिल ही नहीं किया गया। इतना ही नहीं, इस दवा के परीक्षण में शामिल मरीजों को ऐलोपैथी दवाएं दिए जाने की भी खबरें अब सामने आ रही हैं। ऐसे में बाबा रामदेव का हर दावा सिर्फ एक व्यापारी और बड़बोले व्यक्ति के दावों जैसा प्रतीत होता है।

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