Sunday, Nov 28, 2021
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आडवाणी के खिलाफ गवाही देना IPS को पड़ा भारी, सरकार ने की अपील खारिज

  • Updated on 10/26/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र सरकार ने आईपीएस अधिकारी अंजू गुप्ता की रॉ में स्थाई रूप से पद पर बने रहने की अपील खारिज कर दी है।

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सरकार ने कहा है कि खुफिया एजेंसी पहले से ज्‍वाइंट-सेक्रट्री लेवल पर कई अधिकारी पोस्‍टेड हैं। गुप्‍ता पहले उत्‍तर प्रदेश कैडर में थीं। दरअसल, अधिकारी अंजू 1992 बाबरी विध्वंस के मामले से जुड़े होने के चलते सुर्खियों में आई थीं। वेटरन बीजेपी नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी के खिलाफ रायबरेली की विशेष कोर्ट में 2010 में गवाही दी थी।

गुप्‍ता ने कहा था कि आडवाणी ने भीड़ द्वारा मस्जिद गिराए जाने से पहले अयोध्‍या में ‘भड़काऊ भाषण’ दिया था। गुप्‍ता ने कथित तौर पर अदालत में कहा था कि वह जोश में दिखे, उनके भड़काऊ भाषण को, जिन्‍हें उनकी पार्टी के अन्‍य सहयोगियों ने भी सराहा, ने कारसेवकों में जोश भरा।

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उस समय अंजू फैजाबाद में असिस्‍टेंट सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद पर तैनात थीं और 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्‍या में वीवीआईपी की सुरक्षा की इंचार्ज थीं। गुप्‍ता ने ऐसी ही गवाही सीबीआई और लिब्रहान आयोग के सामने भी दी थी। जिसका असर अब नजर आ रहा है।

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