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इन 5 बातों के आधार पर CBI कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस में आरोपियों को कर दिया बरी....

  • Updated on 9/30/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में 28 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुना दिया। इस फैसले में बीजेपी नेता लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इस फैसले को जज एसके यादव ने पढ़ा। यह केस उनके कार्यकाल का आखिरी केस था। 

फैसला सुनाने के दौरान एसके यादव ने 5 अहम बातों का उल्लेख किया और इनकी के आधार पर जज एसके यादव ने अपना दो हजार पन्नों का फैसला लिखा। आइये एक नजर डालते हैं ...

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ये हैं केस के 5 अहम आधार....

1. बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में अब तक किसी भी तरह की साजिश होने के सबूत नहीं मिले यानी ये घटना प्रीप्लांड नहीं थी। कोर्ट ने भी माना कि यह पूरी घटना अचानक, क्रोधवश घटी और जिन भी लोगों को आरोपी बनाया गया है उनका विवादित ढांचा गिराए जाने से कोई संबंध नहीं मिला।

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2.  इस केस में जांच एजेंसी ने जो ऑडियो-वीडियो सबूत पेश किए, उनकी प्रामाणिकता नहीं किया जा सका और न ही उसकी पुष्टि नहीं की जा सकी। सीबीआई ने इस मामले में जो साबुत इकट्ठे किए वो बेकार साबित हुए। इसके अलावा भाषण के जो सबूत सीबीआई ने मुहैया कराए, उनमें भी आवाज साफ नहीं थी।

3. केस को लेकर मुख्य बात जो सामने आई वो ये थी कि अयोध्या में कारसेवा के नाम पर लाखों लोग जुटे, उनमें से कुछ कारसेवकों ने आवेश और गुस्से में आकर ढांचा गिरा दिया। इनमें से किसी की भी पहचान जाहिर नहीं हो पाई।

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4. चार्जशीट में दी गईं तस्वीरें किसी काम नहीं आईं। लेकिन इनमें से अधिकतर तस्वीरों के नेगेटिव कोर्ट तक नहीं पहुंचाए गए। इसलिए फोटो प्रामाणिक सबूत नहीं मानी गईं और अखबारों में लिखी बातों को कोर्ट विश्वसनीय सबूत नहीं मान सकता।

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5. विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल विवादित ढांचे को गिराने के खिलाफ थे, क्योंकि ढांचे के नीचे मूर्तियां थीं, जिसे गिराने से मूर्तियों को नुकसान पहुंच सकता था।

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