Sunday, Oct 17, 2021
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अधूरी इच्छा पूरी करने वापस लौटी बेबी रानी 

  • Updated on 9/8/2021

देहरादून/योगेश योगी। उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर बेबी रानी मौर्य वापस उत्तर प्रदेश लौट रही हैं। बेबी रानी मौर्य अपनी अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए फिर से आगरा को कर्मभूमि बना सकती हैं।राज्यपाल जैसा बड़ा पद मिलने के बावजूद बेबी रानी मौर्य का मन यूपी की सियासत में ही अटका हुआ था।
 बता दें कि 2018 में उत्तराखंड की राज्यपाल बनने से पहले बेबी रानी मौर्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय थी।बेबी रानी भाजपा के टिकट पर आगरा की महापौर रह चुकी हैं। 2007 में बेबी रानी मौर्य ने आगरा जिले की एत्मादपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था।  इस चुनाव में वे हार गई थीं। बेबी रानी मौर्य के नजदीकी लोगों का कहना है कि उस हार की कसक आज तक उनके मन में मौजूद है। शायद उसी कसक ने उन्हें राज्यपाल जैसा सम्मानित पद छोड़ने को मजबूर कर दिया। माना जा रहा है कि बेबी रानी मौर्य 2022 के विधानसभा चुनाव में सक्रिय भागीदारी करेंगी और भाजपा की ओर से उन्हें यू पी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बेबी रानी मौर्य ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा से टिकट की मांग की थी।लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। अब उन्हें 2022 में टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। भाजपा उनके चेहरे को यूपी विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति की बड़ी महिला नेता के तौर पर प्रयोग कर सकती है। 

टिकट कटा लेकिन मिला राज्यपाल का पद
- 2017 के विधानसभा चुनाव में बेबी रानी को टिकट नहीं मिल पाया था लेकिन इसके बाद अगले ही साल उन्हें उत्तराखंड की राज्यपाल बना दिया गया था। बेबी रानी मौर्य को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की नजदीकी माना जाता है।रामनाथ कोविंद जब भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो बेबी रानी मौर्य उनकी टीम में कोषाध्यक्ष हुआ करती थी।
बेबी रानी मौर्य राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

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