Tuesday, Sep 25, 2018

पीठ का दर्द युवाओं के लिए है घातक, ऐसे करें बचाव

  • Updated on 9/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच तेजी से उभर रही पीठ दर्द की समस्या को आमतौर पर लोग अधिक गंभीरता से नहीं लेते मगर डॉक्टरों का मानना है कि शुरूआती दौर में दर्द को नजरअंदाज करना उम्र बढने के साथ बडी परेशानी का सबब बन सकता है।

डॉक्टर इसके लिये सड़क दुर्घटनाओं की बढती आवृत्ति के अलावा ड्राइविंग और कम्प्यूटर पर एक अवस्था में घंटो बैठकर काम करने की प्रवृत्ति समेत अन्य कारकों को जिम्मेदार मानते हैं। 

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उठने-बैठने की सही मुद्रा का ध्यान न रखने और व्यायाम की कमी की वजह से गर्दन, पीठ और कमर दर्द की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका कारण मांसपेशियों, कमर व रीढ़ की हड्डी में मौजूद डिस्क को बचाने वाले वर्टेब्र का क्षतिग्रस्त होना हो सकता है। 

खास यह है कि जहां पहले पीठ व कमर दर्द से जुड़े मामले 45 से 50 की उम्र के लोगों में देखने को मिलते थे, वहीं अब स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली के प्रति लापरवाह 25-30 साल के युवा भी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

पीठ का दर्द यानि स्पॉन्डिलायसिस क्या है
स्पॉन्डिलाइसिस के मामले देश में बहुत ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। जिसमें पीठ में गर्दन से लेकर कमर के पास रीढ़ के अंतिम छोर तक के जोड़ों में दर्द या सूजन हो जाती है। हमारे चलने और बैठने का गलत तरीका गर्दन और कमर के बीच की हड्डी पर असर डालता है। न्यूरो तंत्रिका में खिंचाव के कारण यह दर्द गर्दन, बांह, कंधे, पीठ और कमर तक फैल जाता है। 

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लक्षण
लोअर बैक में दर्द होना सामान्‍य बात है। 80 से 90 फीसदी लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी इस बीमारी से ग्रस्‍त होना पड़ता है। 

  • पेट के निचले भाग में हल्का हल्का जकड़न या चुभन होना।
  • सीधे खड़े होने मे मुश्किल होना।
  • कभी कभी किसी खेलते वक्त चोट लगने से या किसी दुर्घटना के तुरंत बाद दर्द शुरु हो जाता है। ज्यादातर भारी वजन उठाने वाले खेलो में इस प्रकार की मुश्किलें देखी गई हैं।
  • अगर पीठ का दर्द 2-3 महीने से लंबा हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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ऐसे करें उपाय

  • उठने, बैठने व सोने की मुद्रा को ठीक करें। कुर्सी पर बैठते समय मेज की ऊंचाई का ध्यान रखें। गलत मुद्रा में बैठने से पीठ की मांसपेशियों में लचक आ जाती है।
  • दर्द नहीं भी है तो भी नियमित रूप से 20 से 30 मिनट तेज गति से चलें। रस्सी कूदना, सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, स्विमिंग व साइक्लिंग को व्यायाम में शामिल करें।
  • गर्दन को सहारा देने के लिए बोन कॉलर पहनते हैं, बिना परामर्श इसे एक हफ्ते से अधिक न पहनें। यह दर्द कम करने का तरीका है। 
  • लेट कर टीवी न देखें। लंबे समय तक गाड़ी न चलाएं। भारी सामान को ढंग से उठाएं। अपने घुटने मोड़ें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। वजन को शरीर के दोनों भागों में बराबर रखें।
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