Wednesday, Oct 16, 2019
bajwa, interfering in the work of pak government, attended important meetings in abroad

सरकार के काम में दखल दे रहे बाजवा, जानिए क्या हैं PAK के हालात

  • Updated on 10/9/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। पाकिस्तान (Pakistan) में वहां की सरकार से ज्यादा समय-समय सेना का प्रभुत्व देखा गया है। वहीं स्थिति एक बार फिर पाक में देखा जा रहा है यहां सरकार के कामकाज में सेना का दखल बढ़ता जा रहा है। हाल ही में पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) पीएम इमरान खान (Imran Khan) के साथ चीन (China) के दौरे पर पहुंचे। इससे साफ होता है कि आर्थिक मोर्चे पर दखल के बाद अब सेना प्रमुख विदेश निति में भी दखल चाहते हैं। 

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बाजवा चीन में हुए अहम मुलाकातों में शामिल हुए
जनरल बाजवा, इमरान खान के साथ चीन दौरे पर वहां के बड़े नेताओं के साथ हुई अहम मुलाकातों में शामिल हुए। पाकिस्तान में आमतौर पर देखा गया है कि सत्ता में आई सरकारें सेना के अतंर्गत ही काम करती है। अब देखा जा रहा है कि बाजवा सरकार के कामकाज और निर्णयों में भी अपना दखल बढ़ा रहे है।

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पाक-चीन के सैन्य संबंधों पर हुई चर्चा 
दरअसल मंगलवार को चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग और सेंट्रल मिलिट्री कमिशन के वाइस चेयरमैन के साथ हुए मीटिंग में इमरान खान और बाजवा दोनो मौजूद थे, और इन मीटिंगों के दौरान दोनों देशों के सैन्य संबंधों को लेकर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि इसी महिने चीन के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग और नैशनल पीपल्स कांग्रेस के चेयरमैन ली झांशू के साथ होने वाली मीटिंग में भी इमरान के साथ बाजवा शामिल हो सकते हैं।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भी थे बाजवा
पाकिस्तान के जनरल बाजवा इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भी थे उस समय इनके साथ आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद भी थे। इसके अलावा पाकिस्तान की इकनॉमी को बदहाली से कैसे उबारा जा सकता है, इस पर जनरल ने हाल ही में मुल्क के कारोबारियों के साथ प्राइवेट मीटिंग भी की थी।

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पाक को चीन से तालमेल में हो रही दिक्कत
बात दें कि इमरान खान को चीन-पाक इकनॉमिक कॉरिडोर में आने वाले कुछ अहम प्रोजेक्ट्स में देरी होने से चाइनीज लीडरशिप के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत हो रही है। पिछले साल सितंबर में चीन के प्रेसिडेंट शी ने जनरल बाजवा से मुलाकात की थी, जिनकी आर्मी ने सीपीईसी प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले हजारों चाइनीज कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एक अलग फोर्स बनाई है।

इस साल अगस्त में चीन ने बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ाने के इमरान के कदम का स्वागत किया था और बाजवा को उनकी फौज का असाधारण नायक और चीन सरकार का पुराना दोस्त बताया था। ऐसे में देखा जा सकता है कि पाक सेना प्रमुख को सरकार के हर फैसले में जगह मील रही है।  

अगर हम पाकिस्तान में 1947 के का इतिहास देखे तो यहां आधा हिस्सा सेना के शासन का रहा है, और इस दौरान तीन बार सैन्य तख्तापलत हो चुका है। 


 

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