Monday, Jun 21, 2021
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RBI ने 6 महीने की किस्त में छूट देकर ग्राहकों को डाला मुश्किल में, जानिए क्या है इस 'ऑफर' का सच...

  • Updated on 5/26/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लॉकडाउन के बीच ग्राहकों को राहत देने के लिए 6 माह तक लोन की किस्तों को न देने की रियायत दी है। इस छूट के बाद अब लोन लेने के शुरूआती 6 महीनों तक ग्राहक बिना किस्त चुकाए भी रह सकता है और इस दौरान बैंक ग्राहक पर दवाब नहीं बनाएगा और ना उसे डिफ़ॉल्ट की लिस्ट में डालेगा।

लगेगा बड़ा झटका
लेकिन इस बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि 6 महीनें की ये छूट ग्राहकों को बड़ा झटका है। दरअसल, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्राहकों पर ब्याज बढ़ता रहेगा और फिर एक साथ इसे चुकाने पर ग्राहक को बड़ा झटका लगेगा और यही कारण है कि इस छूट के पहले फेज में एसबीआई के केवल 20% ग्राहकों ने इस आप्शन को चुना।

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आगे लोन मिलने में आएगी दिक्कत
इस आप्शन को चुनने के बाद ग्राहकों का लोन एनपीए के दायरे में नहीं आएगा और ना ही उन्हें सिबिल पर इसका कोई असर होगा लेकिन इसके बाद भी आने वाले अगले एक साल तक ये ग्राहक की आगे और लोन लेने की क्षमता पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

बैंक कर्ज देने में करेंगी आनाकानी
इस आप्शन को चुनने वाले ग्राहकों को आगे बैंक लोन देने में आनाकानी करेंगी। वो हिस्ट्री देख कर ये अंदाजा लगा लेंगी कि ग्राहक किस्तें पूरी नहीं कर सकता और न ही बड़ा लोन चुकाने के काबिल होगा इसलिए बैंक लोन देने से बचेंगी।

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ऐसे ग्राहकों को मिलेंगे तीन विकल्प
-यह छूट जब खत्म होगी तब ग्राहक को एक साथ ब्याज सहित पूरा भुगतान करना होगा।
-कुल ब्याज का जितना भी बकाया होगा उसे लोन में जोड़ दिया जाएगा और फिर उसी के हिसाब से लोन चुकाने की बची अवधि में किस्त की बढ़े अमाउंट का पेमेंट करना होगा।
-इसमें लोन चुकाने की अवधि बढ़ा दी जाएगी और कुल ब्याज को बाकी बचे लोन में जोड़ दिया जाएगा।

भरना पड़ेगा भारी ब्याज अमाउंट
इस 6 माह की छूट के ऐलान पर आरबीआई ने कहा था कि ईएमआई भुगतान में मिली छूट पर दिए गये समय पर जितनी भी ब्याज बनेगी वो ग्राहक को देनी होगी। पॉसिबल है कि बैंक इस अमाउंट को टर्म लोन में बदल दें ताकि पहले से चल रहे लोन में दिक्कत न आए।

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ऐसे समझें ब्याज का गणित
इसे आप ऐसे समझ सकते है कि बैंक अगर इस को आप्शन को चुनता है तो ग्राहक को टर्म लोन के तहत जो ब्याज बचा है उस पर भी ब्याज चुकाना होगा। जैसे- मान लें कि अगर किसी की 30 हजार की किस्त में 18 हजार की ब्याज शामिल है और 6 महीनें की छूट का आप्शन चुना है तो उसे 1 लाख 8 हजार रूपये की कुल ब्याज चुकानी होगी।

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