ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा और वंदना, करें इस खास मंत्र का जाप

  • Updated on 2/10/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  देवी सरस्वती का पूजन करने के लिए बसंत पचंमी की इंतजार किया जाता है। माघ महीने में पूर्वी भारत में इसे बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। बंग्लादेश के पश्चमी भाग और नेपाल के कुछ हिस्सों में बसंत पचंमी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं पूर्वी भारत में पीले कपड़े पहनती हैं। कई जगहों पर इस महीने में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस बार बसंच पंचमी 10 फरवरी को पड़ने वाली है। 

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इस दिन कहते हैं कि मां सरस्वती का अविर्भाव हुआ था। इस दिन पले रंग क वस्त्र पहनकर पीले रंग के पकवान खाते हैं। साथ ही ये दिन सबसे शुभ माना जाता है इसलिए सभी शुभ और मंगलकारी काम इस दिन किए जाते हैं। मां सरस्वती को ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है इसलिए इस दिन बच्चों को जोकि पढ़ाई करते हैं उन्हें अच्छी पुस्तकें भेंट की जा सकती हैं। साथ ही सरस्वती मां वीणा वादिनी थीं, इस दिन गायन में रुचि रखने वालों को भी वाद्य यंत्र भेंट दिया जा सकता है। 

बसंत पंचमी के साथ ही मौसम में भी बहार आ जाती है। इससे सरसों के फूल खिल जाते हैं और आम के पेड़ों पर बौर आ जाती हैं और साथ ही ठंड जाने के साथ मौसम खिल उठता है। 

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कैसे होता है बसंत पंचमी पर पूजन?

इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है साथ ही उन्हें कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं। 

इस दिन पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की पूजा की जाती है। 

इस दिन दान करने का बहुत महत्व है। गरीब बच्चों को और जरुरतमंदों को दान देने से सौभाग्य बढ़ता है। इस दिन अध्ययन से संबंधी कुछ दान करने से ज्ञान में बढ़ोत्तरी होती है और मां सरस्वती का आर्शिवाद मिलता है। 

इस मंत्र का करें उच्चारण

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥ 

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