Sunday, Mar 24, 2019

Surf Excel के ऐड को विवादित बताने वालों जरा इन Advertisements को भी देखो

  • Updated on 3/13/2019

नई दिल्ली/श्वेता राणा। इन दिनों इस देश में अगर लोकसभा चुनावों के बाद कोई मुद्दा गर्म है तो वो एक सर्फ की ऐड है। पिछले कई दिनों से इस ऐड ने हर जगह सुर्खियां बटोरी है। अब सर्फ एक्सल से कपड़ों के दाग जाते है या नहीं इसकी कोई गारंटी हम नहीं दे सकते लेकिन सवाल यह है कि इस ऐड को देखने के बाद जिन लोगों की बुद्धि पर दाग लगे हैं उन्हें कैसे साफ किया जाए? 

एक सर्फ का विज्ञापन देश में इतना अहम हो गया कि बाकी लोग और मुद्दों से भटक कर इसका बहिष्कार करने पर उतर आए। कपड़े धोने के पाउडर के इस विज्ञापन ने समाज में एकता पर जोर दिया था, मगर कुछ लोगों को वो रास नहीं आया और उन्होंने इस विज्ञापन का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध किया। 

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नफरत की ये गाड़ी यहीं नहीं रुकती, इस विज्ञापन को लव जिहाद बढ़ाने वाला ऐड भी  करार दे दिया गया। बकायदा इसे लेकर फरमान जारी होने लगे और ये तक खोजा जाने लगा कि आखिर कंपनी का मालिक कौन से धर्म से संबंध रखता है।

अगर आपको इस ऐड से इतनी आपत्ति है तो फिर आपको उन ऐड्स से भी उतनी ही दिक्कत होनी चाहिए जिसमें एक क्रीम आपको एलईडी लाइट की तरह चमकदार बनाती है, तो वहीं दूसरी ओर एक लड़की मर्द के पीछे उसके डिओडोरेंट की खुशबू से पगलाई भाग रही होती है।

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एटीन अगेन वजाइना टाइटनिंग जेल
सर्फ एक्सल की ऐड को लव जिहाद करार देने वाले लोगों को एक बार इस ऐड पर भी गौर फरमाना चाहिए। भारत जैसे देश में जहां शादी से पहले सेक्स करना अपराध माना जाता है उस समाज में वजाइना टाइटनिंग को लेकर एक ऐड बनाया गया है। 

मतलब 50 साल की उम्र में महिला बिलकुल वैसी होनी चाहिए जैसी वह 18 साल में थी। महिला जब वर्जन फील करेगी तब ही तो उसका अपने पति से रिश्ता कायम रहेगा। मतलब किस तरह का घिनौनापन यहां पेश किया जा रहा है लेकिन लोगों को इसपर कोई आपत्ति नहीं है। 

पतजंलि ने जब सौंदर्य के लिए तय किए नए RULES
अपने प्रोडेक्ट पर बड़े-बड़े दावे ठोकने वाली पतंजलि की एक ऐड को भी इस कड़ी में शामिल किया जाना चाहिए। हम बात कर रहे हैं उस ऐड की जिसमें एक लड़की को सिर्फ मॉर्डन होने की वजह से बदसूरत दिखा दिया जाता है।

पतंजलि के हिसाब से शहर में रहने वाली लड़कियां और अप टू डेट रहने वाली लड़कियां संस्कारी नहीं होती, क्योंकि ऐड में तो यही दिखाया गया है। ऐड के मुताबिक, दूसरी लड़की संस्कारी है क्योंकि वो पारंपरिक तरीके से बने पतंजलि के प्रोडेक्टस का इस्तेमाल करती है। 

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मदर डेयरी ने इस तरह बताया महिला को सशक्त बनने का राज
आज के दौर में जब महिलाओं को लेकर सम्मान, सुरक्षा, और बराबरी की बात की जाती है उस दौर में मदर डेयरी का ये ऐड आंखों को खलता है। बच्चों की गलती को अक्सर मां नजरअंदाज करती है या कहे कि उनकी गलतियां छिपाकर खुद डांट खाती है लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि महिलाएं चुप-चाप यह सहती रहे।

महिला को सशक्त करने की कसमें खाने वाले इस समाज में यह ऐड एक तरह की हकिकत बयां करता है। ऐड में हमारे पुरुष प्रधान समाज को बहुत ही उम्दा तरीके से पेश किया गया है। दिखाया गया है कि महिला पर अगर हक है तो सिर्फ मर्द का। पहले पति का बाद में उसके बेटे का। बेटा बड़ा होकर मां को बेहतर जिंदगी से रूबरू कराएगा, लेकिन तब तक मां को ये सब तो सहना होगा। आखिर मां... मां होती है, उसके जैसा कोई नहीं।

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