Tuesday, Apr 13, 2021
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मप्र उपचुनाव से पहले नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने खोला मोर्चा

  • Updated on 10/5/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मप्र उपचुनाव से पहले किसानों और मजदूरों के एक संगठन ने 3 नये कृषि कानूनों के खिलाफ मध्य प्रदेश में मोर्चा खोलते हुए सोमवार से जागरण अभियान शुरू किया। यह संगठन तीनों कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए इन्हें तुरंत वापस लिए जाने की मांग कर रहा है। किसानों का यह अभियान भाजपा को आगामी चुनाव में भारी पड़ सकता है।

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राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'कॉर्पोरेट क्षेत्र और उद्योग-व्यापार जगत के बड़े खिलाडिय़ों के हित में बनाए गए तीनों कृषि कानून कुछ और नहीं, बल्कि किसानों के लिए मौत का फरमान हैं। केंद्र सरकार को इन किसान विरोधी कानूनों को फौरन वापस लेना चाहिए।' 

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उन्होंने यह मांग भी की कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना चाहिए कि देश भर के कारोबारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों की उपज खरीदेंगे। 'कक्काजी' के नाम से मशहूर वरिष्ठ किसान नेता ने कहा, 'इस कानून में यह प्रावधान होना चाहिए कि अगर किसी कारोबारी ने एमएसपी से कम दाम पर किसान की उपज खरीदी, तो एमएसपी और वास्तविक खरीद मूल्य के बीच के अंतर की राशि उसे जुर्माने के रूप में अदा करनी होगी और उसका व्यापार लायसेंस जब्त कर लिया जाएगा।'

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शर्मा ने दावा किया कि नये कानूनों से खेती-किसानी के क्षेत्र पर कॉर्पोरेट दिग्गजों का एकाधिकार हो जाएगा, कृषि जिंसों की जमाखोरी व कालाबाजारी को बल मिलेगा और अन्नदाताओं की हालत बद से बदतर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि नये कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ का सोमवार से शुरू हुआ अभियान प्रदेश भर में दो हिस्सों में दिसंबर तक चलेगा। इस अभियान के तहत किसानों और मजदूरों को इन कानूनों के कथित नुकसानों को लेकर जागरूक किया जाएगा। 

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शर्मा ने एक सवाल पर इस आरोप को खारिज किया कि यह अभियान राज्य की 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को होने वाले उप चुनावों में कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम एक गैर राजनीतिक संगठन हैं। हमारे अभियान का आगामी उपचुनावों से कोई लेना-देना नहीं है।'

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