Monday, Oct 25, 2021
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मोदी सरकार से 8वें दौर की वार्ता से पहले किसानों ने आंदोलन को दी रफ्तार

  • Updated on 1/5/2021


नई दिल्ली, 5 जनवरी (नवोदय टाइम्स)। दिल्ली की सीमाओं को बीते 41 दिन से घेर कर बैठे किसानों ने सरकार से आठवें दौर की वार्ता से पहले दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। आंदोलन को गति देते हुए किसानों ने 7 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने का फैसला लिया है। वहीं 6 जनवरी से देशभर में जनजागरण अभियान शुरू करेंगे।

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आंदोलनरत किसानों के साथ सरकार की आठवें दौर की वार्ता 8 जनवरी को प्रस्तावित है। इसके पहले सिंघू बॉर्डर पर मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। किसानों ने 7 जनवरी, वीरवार को ट्रैक्टर मार्च करने का तय किया और 9 से 13 जनवरी तक संकल्प दिवस मनाएंगे।

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बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने किसानों की ओर से बताया कि 7 जनवरी को सुबह 11 बजे एक्सप्रेसवे पर किसान कुंडली बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर से पलवल की तरफ, मेवात के रेवासन से पलवल की तरफ से ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। उन्होंने बताया कि बुधवार, 6 जनवरी से अगले दो सप्ताह तक पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें किसानों को तीनों कानूनों की कमियां-खामियां बताने के साथ ही इससे होने वाले नुकसानों की जानकारी दी जाएगी और किसान आंदोलन को देश के कोने-कोने में फैलाया जाएगा।

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इस बीच किसान नेता हन्नन मोल्लाह ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि तीनों कानून वापस हों। उन्होंने कहा कि ये कानून व्यापारियों के लिए बने हैं, उत्पादकों के लिए नहीं। सरकार हमें उत्पादक से व्यापारी बनाना चाहती है। यह हमें नहीं चाहिए। हम उत्पादक ही रहना चाहते हैं। मालूम हो कि किसान नए कृषि सुधार कानूनों की मुखालफत कर रहे हैं। बारिश और कड़कड़ाती ठंड में भी पंजाब-हरियाणा समेत पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के हजारों किसान 41 दिनों से दिल्ली की सीमाओं को घेर कर बैठे हैं। इस दौरान ठंड के चलते करीब 40 किसानों की मौत हो चुकी है और कई ने आत्महत्या कर ली है।

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---उदासीन और अहंकारी मोदी सरकारः राहुल
किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। राहुल ने मंगलवार को एक ट्वीट किया-मोदी सरकार की उदासीनता और अहंकार ने 60 से ज्यादा किसानों की जान ले ली है। उनके आंसू पोछने की बजाए, भारत सरकार आंसू गैस के साथ उन पर हमला करने में व्यस्त है। ऐसी क्रूरता, सिर्फ क्रोनी कैपिटलिस्ट के व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विरोधी कानूनों को निरस्त करें।

 

 

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