Wednesday, Apr 14, 2021
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bengal elections: meaning of mamta''''s five-day stay in nandigram musrnt

प. बंगाल चुनावः ममता के नंदीग्राम में पांच दिनी प्रवास के मायने

  • Updated on 4/1/2021

नई दिल्ली/अकु श्रीवास्तव। राजनीति में ऐसे नजारे बहुत कम देखने को मिलते हैं, जो राजनीति की दिशा बदलने वाले होते हैं। यों तो पूरे पश्चिमी बंगाल में ऐसा ही नजरा दिख रहा है, लेकिन नंदीग्राम तो बिल्कुल ही अलग है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी जी- जान से लड़ रही हैं, उनके लिए यह करो या मरो की लड़ाई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी पूरे जोशो- खरोश के साथ आक्रामक मुद्रा में है।

सवाल यह है कि पिछले बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ तीन सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी ऐसी क्या क्रांति कर देगी, जिससे सत्ता परिवर्तन हो जाए। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से राज्य में उसकी तूती बोल रही है। पहले चरण में जिन 30 सीटों पर मतदान हो चुका है, उनमें से वह 26 सीटें जीतने का दावा कर रही है। यह दावा किसी स्थानीय नेता ने नहीं बल्कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने किया है। इससे चिढ़कर ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि चार सीटें क्यों छोड़ दी भाई। तीसों सीटें जीत लेते।

स्थानीय पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि ममता बनर्जी से इस बार जो कभी नहीं होती है, रणनीतिक चूक हो चुकी है। उनका इशारा नंदीग्राम से उनके चुनाव लड़ने का फैसले को लेकर है। नंदीग्राम उनके लिए भाजपा का जटिल चक्रव्यूह साबित हो रहा है। भवानीपुर की सीट उनके लिए सुरक्षित थी। पिछले चुनाव में उन्हें वहां 65 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। मगर नंदीग्राम में उनकी स्थिति यह है कि वह पांच दिन से यहीं फंसकर रह गई हैं। बाकी सीटों के लिए वक्त नहीं निकाल पा रही हैं।

भवानीपुर को छोड़कर नंदीग्राम से लड़ने का फैसला जोश में लिया गया है। शुभेंदु अधिकारी यहां से पिछला चुनाव 80 हजार से अधिक वोटों से जीते थे और ममता सरकार में मंत्री थे। चुनाव से कुछ माह पहले ही वह पाला बदलकर भाजपा में आए। उनके लिए भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्र का हर मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री आकर प्रचार कर चुके हैं।

ममता को जो चुनाव शुरू में बहुत आसान लग रहा था, वह अब कठिन होता जा रहा है। ऐसा उन्हें भी लग रहा है। पहले चरण के मतदान के दिन ही उनका ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वह नंदीग्राम  के एक स्थानीय भाजपा  नेता प्रलय पाल, जो पहले टीएमसी में थे, से चुनाव में मदद के लिए अनुनय- विनय कर रही हैं।

दूसरी तरफ कभी सिर्फ मां, माटी और मानुष की बात करने वालीं ममता अब अपना गोत्र बताने पर मजबूर हैं। वह प्रचार के दौरान किस्सा सुना रही हैं कि मैं एक मंदिर में गई जहां पुजारी ने मुझसे मेरा गोत्र पूछा तो मैंने उसे बताया- मां माटी मानुष, लेकिन वास्तव में मैं शांडिल्य हूं। मगर उनके ऐसा कहते ही विपक्ष ने उन पर निशाना साध लिया है। भाजपा नेता और एआईएमआईएम के नेता ओवैसी उन पर तंज कस रहे हैं कि उनकी भाषा हार से डरे व्यक्ति की है। वह निराश हैं।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो सीधे कह दिया है कि यह चुनाव हारने का डर है, जो ममता दीदी अपना गोत्र बता रही हैं। लेकिन यह तो तय है कि नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का उनका फैसला अगर गलत पड़ गया, उन्हें फिर पीछे धकेल देगा। ममता बनर्जी ने जितना बड़ा राजनैतिक साम्राज्य बनाया है, वह नंदीग्राम से खत्म करना मुश्किल है। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि क्या होने जा रहा है, लेकिन दबाव में निश्चितरूप से ममता हैं। और शायद उसकी ही वजह से आज वो भाजपा के खिलाफ सभी दलों के नेताओं को चिट्टी लिखने को मजबूर हुई हैं। 

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