Saturday, Nov 17, 2018

सावधान ! कहीं आपके बच्चे तो नहीं हैं 'मोबाइल एडिक्ट', 50 प्रतिशत बच्चे रीढ़ की बीमारी की चपेट में

  • Updated on 9/19/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/अंकुर शुक्ला।  मोबाइल एडिक्शन से होने वाले खतरों की झलक पहले ही देखी जा चुकी है, लेकिन अब मोबाइल फोन की लत से बच्चों के रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो रही है। नतीजतन वर्तमान और भविष्य में शारीरिक पीड़ा से संबंधित बीमारियों की जद में आने का जोखिम बढ़ता जा रहा है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक इस खतरे से अभिभावक अनजान हैं और उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू कर देना चाहिए। अभिभावकों को शायद यह अंदाजा ही नहीं है कि मोबाइल फोन की लत उनके बच्चों के लिए भयंकर शारीरिक कष्ट का कारण बन सकता है। 

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नोमोफोबिया बना रहा है तेजी से शिकार एक गैरसरकारी संस्था प्यू रिसर्च सेंटर के एक के अध्ययन के मुताबिक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले लोग एक दिन में औसतन 150 बार मोबाइल देखते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वह इससे अलग नहीं हो सकते हैं। देखते-देखते यह समस्या नोमोफोबिया में तब्दील होती जा रही है।

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मुंबई स्थित लीलावती अस्पताल ने हाल में ही अपने सर्वेक्षण के नतीजों से बड़ी चेतावनी जारी की है। सर्वे में कहा गया है कि लगभग 50 प्रतिशत भारतीय बच्चों और किशोरों में मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग की वजह से रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याएं पैदा हो रही हैं।

शुरुआत में लक्षण पीड़ादायक होता है जो कि गर्दन, सिरदर्द आंखों में जलन होने तक सीमित रहता है लेकिन आगे चलकर यह गंभीर शारीरिक परेशानी का कारण बन जाता है। 

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ऐसे रखें ध्यान 
 

  • घर में विशेष नो फोन जोन बनाएं।
  • फोन को ऐसी जगह रखें जहां बच्चों का ध्यान कम जाए।
  • बच्चों के स्मार्टफोन की गतिविधियों पर नजर रखें।
  • बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।  

डॉ. ओमप्रकाश, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, इहबाह अस्पताल

बच्चों की आदत, व्यवहार और उससे संबंधित परिवर्तन की निगरानी कर हम काफी हद तक समस्याओं से बच सकते हैं। उन्हें जैसे सांचे में ढालेंगे, वैसा ही उनका व्यवहार होगा। फोन के अत्यधिक प्रयोग के खतरों के प्रति घर में अभिभावक और स्कूल में शिक्षक बच्चों को जागरूक कर सकते हैं। 

 

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