Monday, Nov 29, 2021
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bharat bandh protest at delhi university north campus against caa and nrc

बंगाल के अलावा दिल्ली में दिखा 'भारत बंद' का असर, ट्रेड यूनियन ने निकाला मार्च

  • Updated on 1/8/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र सरकार (Central Government) की 'जन विरोधी' नीतियों के खिलाफ बुधवार को 10 ट्रेड यूनियनों ने 'भारत बंद' का आह्वान किया है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारी पश्चिम बंगाल में तोड़-फोड़ कर रहे हैं और ट्रेनों को रोक रहे हैं। अब बंगाल के अलावा दिल्ली में भी भारत बंद का असर दिखाई दे रहा है। दिल्ली (Delhi) में ट्रेड यूनियन की तरफ से मार्च निकाला गया।

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दिल्ली में ट्रेड यूनियन ने निकाला मार्च
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के खिलाफ और दस ट्रेड यूनियनों द्वारा भारत बंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। 

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ज्यादातर यूनियनों ने हड़ताल में भाग लेने की दी सहमती
बैंक कर्मचारियों की ज्यादातर यूनियनों ने भी हड़ताल में भाग लेने और उसका समर्थन करने की अपनी इच्छा जाहिर कर दी है। बैंक कर्मचारियों की अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए), भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघों और बैंक कर्मचारी सेना महासंघ सहित विभिन्न यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन करने का फैसला किया है। बैंकों में राशि जमा करने, निकासी करने, चेक क्लियरिंग और विभिन्न वित्तीय साधनों को जारी करने का काम हड़ताल की वजह से प्रभावित हो सकता है।

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जन- विरोधी' नीतियों के खिलाफ की जा रही है हड़ताल
हालांकि, निजी क्षेत्र के बैंकों में सेवाओं पर कोई असर पडने की संभावना नहीं है। सरकार की 'जन- विरोधी' नीतियों के खिलाफ की जा रही इस हड़ताल में देशभर में 25 करोड़ लोगों के भाग लेने की उम्मीद है। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिन्द मजदूर सभा (एचएमएस), कन्फेडरेशन आफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के अलावा टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी तथा विभिन्न क्षेत्रों की स्वतंत्र यूनियनों और महासंघों ने पिछले साल सितंबर में ही आठ जनवरी 2020 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी थी।

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25 करोड़ से अधिक कामकाजी लोग करेंगे भागीदारी
दस कर्मचारी संघों के परिसंघ ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा है, ‘‘श्रम मंत्रालय कर्मचारियों की किसी भी मांग को लेकर आश्वासन नहीं दे पाया। मंत्रालय ने दो जनवरी 2020 को कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी। सरकार की नीतियों और कार्रवाई से लगता है कि सरकार का श्रमिकों के प्रति रवैया ठीक नहीं है।’’  इसमें कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि आठ जनवरी 2020 को होने वाली आम हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कामकाजी लोग भागीदारी करेंगे। सरकार की कर्मचारी विरोधी, जन विरोधी और राष्ट्र विरोधी नीतियों के खिलाफ इस हड़ताल के बाद और भी कदम उठाये जायेंगे।

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