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इन प्वाइंट में जानिए, कृषि बिल के खिलाफ क्यों हो रहा है किसान आंदोलन?

  • Updated on 9/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। संसद से पास हुए तीन कृषि विधेयकों (Agriculture bill) के विरोध में आज किसान और किसान संगठन मिलाकर देशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। जिसका ज्यादा असर पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) में दिख रहा है। पंजाब में किसान मजदूर संघर्ष समिति तीन दिन तक रेल रोको आंदोलन करेगी, जिसे अन्य किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया है। 

कुछ किसान दिल्ली भी आ रहे हैं और उन्हें कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है। आइए कुछ प्वाइंट में समझते हैं कि आखिर क्यों किसान मोदी सरकार (Modi Government) के लाए नए तीन बिलों को लेकर नाराज है।

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न्यूनतम समर्थन मूल्य 
नए बिलों को लेकर किसान सबसे ज्यादा इस बात से परेशान हैं कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP- Minimum Support Price) नहीं मिलेगा बल्कि किसानों को इसके खत्म होने का पूरा अंदेशा है। हालांकि सरकार इस बात को ख़ारिज करती आ रही है। दरअसल, इस नए बिल के जरिए सरकार ने मंडी से बाहर भी कृषि कारोबार का रास्ता खोल दिया है। अब मंडी के बाहर भी लेन-देन हो सकेगा। जहां मंडी के अंदर लाइसेंसी ट्रेडर किसान से उसकी उपज एमएसपी पर लेते रहे हैं लेकिन बाहर कारोबार करने वालों के लिए एमएसपी को बेंचमार्क नहीं बनाया गया है ऐसे में मंडी से बाहर एमएसपी मिलने की कोई गारंटी नहीं होगी।

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मंडियां हो जायेंगी खत्म  
भले ही सरकार ने नए बिल में मंडियों को खत्म करने की बात नहीं लिखी है लेकिन ये लगभग तय है कि नए नियमों का असर मंडियों को तबाह कर सकता है और इसी बात से किसान सबसे अधिक चिंता में है। यही वो कारण है जिसकी वजह से आढ़तियों को भी डर सता रहा है। ये कारण ही किसान और आढ़ती को एक साथ लाया है।

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मंडियों के अंदर टैक्स
नए बिल के आने से मंडियों के अंदर टैक्स चुकाया जाएगा जबकि मंडियों के बाहर कोई टैक्स नहीं लगेगा। वर्तमान में मंडी से बाहर जिस कृषि व्यापार की सरकार द्वारा व्यवस्था की गई है उसमें कारोबारी को कोई टैक्स नहीं देना होगा लेकिन मंडी के अंदर औसतन 6-7% तक का मंडी टैक्स लगता है।

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बाजार पर जोर 
किसानों ने अपने पक्ष में इस बात को सरकार के सामने रखा है कि नए बिलों के बाद मंडी के बाहर से आढ़तिया और व्यापारी अपना टैक्स बचाने के लिए खरीदारी करेगा, जिसके लिए उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा। अगर ऐसा होता है तो फिर मंडी व्यवस्था खत्म हो सकती है। अगर इससे मंडी समिति कमजोर होंगी तो किसान मंडी को छोड़कर बाजार के हवाले चला जाएगा।  जिससे किसानों को तय रेट से काम भी मिल सकता है और कम भी।  

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कानूनी अधिकार छीना
इन नए बिलों में एक बिल कांट्रैक्ट फार्मिंग से भी जुड़ा है। जिसमें किसानों से कोर्ट जाने का अधिकार भी छीन लिया गया है। अगर किसान और कंपनियों के बीच विवाद होता है तो इसका फैसला एसडीएम करेगा। यानी किसने की अपील डीएम के पास जाएगी न की कोर्ट में। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसानों के साथ पुलिस का रवैया रहा है तो उसे देखते हुए किसानों को भी डीएम, एसडीएम पर विश्वास नहीं है। जाहिर है कि ये सभी लोग सरकार के कहे पर चलते हैं और उनकी बात कोई नहीं सुनता।  

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किसान को सरकार पर नहीं विश्वास
वहीँ, किसानों के विरोध करने पर सरकार लगातार कहती आ रही है कि एमएसपी जारी रहेगी। लेकिन इस बात को सरकार ने नए बिल में कहीं नहीं लिखा है। ऐसे हालातों में जब किसान से उसके अधिकार छीन लिए गए हैं तब किसी मसौदे में एमएसपी जारी रखने की बात न लिखी होने पर किसान को डर है कि सरकार अपनी बात से मुकर सकती है। वहीँ, किसान नए बिलों में न लिखी बातों को लेकर सरकार को कोर्ट में नहीं घसीट सकता क्योंकि इसका कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है।

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