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शैक्षिक उन्नयन विचार संगोष्ठी में बोले धन सिंह रावत, शिक्षा का स्तर उठाने को सभी करें उपाय

  • Updated on 6/17/2018

हरिद्वार/ब्यूरो। राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य राज्य में शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए एक मंच पर आए। शिक्षाविदों ने राज्य के युवाओं के नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके चहुंमुखी विकास पर विविध सूत्र सुझाए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित रखने पर बल दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ धन सिंह रावत व देसंविवि (देव संस्कृति विश्व विद्यालय) के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने की।

शिक्षामंत्री रावत ने राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में सकारात्मक परिवर्तन के विविध उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए एक नया पैरामीटर बनाने की आवश्यकता है। जिसे सभी वर्ग के विद्यार्थी समान भाव से अपना सकें। शैक्षणिक संस्थानों में किताबों, खेल के सामान, प्रयोगशालाओं के लिए सामग्री आदि पर चर्चा करते हुए प्रधानाचार्यों से सुझाव भी मांगे।

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रावत ने देसंविवि के अनुशासन व कार्य पद्धति के अध्ययन के लिए कुलपतियों एवं प्रधानाचार्यों का एक विशेष सत्र रखा। इसमें सैद्धांतिक व व्यावहारिक पक्षों की जानकारी दी गयी। इस दौरान उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने देसंविवि की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यहां पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य व वंदनीया माताजी द्वारा प्रतिपादित ‘शिक्षा ही नहीं, विद्या भी’ का मॉडल सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने देसंविवि की संस्कृति आधारित शिक्षा को उत्तराखंड का गौरव बताया।

देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा जगत की विसंगतियों को दूर करने के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम (शिक्षा) के साथ विद्या (जीवन मूल्य) का ज्ञान से अवगत कराना आवश्यक है। विद्यावान व्यक्ति ही समाज व राष्ट्र को ऊंचा उठा सकते हैं। व्यक्ति को संस्कारित करने व संस्कृति को संंवारने का काम शैक्षिक संस्थानों का है। इस पर शिक्षाविदों को ध्यान देना चाहिए। आज लोग धन-संपदा पैदा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। जो जीवन भर साथ देने वाला संस्कार है, उस पर कम ध्यान दिया जाता है। देसंविवि के कई कार्यक्रमों को लाटविया सहित कई देशों के शैक्षणिक संस्थानों ने अपनाया है। इससे वहां के विद्यार्थियों में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। 

उच्च शिक्षा विभाग की निदेशक सविता मोहन ने कहा कि उत्तराखंड के कई प्रतिभाशाली व्यक्तियों ने आज देश-विदेश में अपना मुकाम हासिल किया है। संकल्प के साथ अपने-अपने संस्थानों के विद्यार्थियों के विकास के लिए हर मुमकिन उपाय करेंगे। देसंविवि के कुलसचिव संदीप कुमार ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, कुमाऊं विवि के कुलपति एचएस धामी, उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित, अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, अनेक कुलपति सहित पीजी कॉलेज के प्रधानाचार्य और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा ने किया।

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