Wednesday, Mar 03, 2021
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दलित संगठनों ने की दस्तावेज के बजाय DNA आधारित NRC करने की मांग

  • Updated on 2/12/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भीम आर्मी (Bhim Army) समेत कुछ दलित संगठनों ने बुधवार को संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के खिलाफ गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट पर पोस्टकार्ड अभियान चलाया और दस्तावेज के बजाय डीएनए आधारित एनआरसी करने की मांग की।         
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के बाहर लगे पोस्टर
भीम आर्मी, पूर्वांचल सेना और असुर छात्र संगठन ने गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) के गेट पर चलाये गये ‘पीएम को पोस्टकार्ड लिखो’अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) को सम्बोधित करीब 500 पोस्टकार्ड डाक के जरिये भेजे। इन पोस्टकार्ड में सीएए को वापस लेने, एनआरसी और एनपीआर का इरादा छोडऩे की मांग की। पूर्वांचल सेना के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि एनआरसी की कवायद नागरिकता के दस्तावेजों के बजाय डीएनए (DNA) के आधार पर होनी चाहिये। इससे पता चल जाएगा कि कौन भारत का वास्तविक नागरिक है और कौन प्रवासी। अनेक लोग जो सीएए और एनआरसी चाहते हैं वे दरअसल बाहर से भारत में आये थे।           
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4500 पोस्टकार्ड लिखे गए
उन्होंने बताया कि यह पोस्टकार्ड (Post) अभियान गत चार फरवरी को उनवाल इलाके से शुरू हुआ था। उसके बाद से रानीपुर, जिगिना, हरदिया, पिचौरा और खजनी गांवों से रोजाना करीब 300 खत लिखे जा रहे हैं। अब तक करीब 4500 पोस्टकार्ड लिखे जा चुके हैं। यह अभियान महराजगंज में भी शुरू हो चुका है। प्रताप ने कहा कि पूरे देश में जगह-जगह सीएए, एनआरसी और एनपीआर का विरोध किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य प्रधानमंत्री को सीएए, एनआरसी और एनपीआर के इरादा छोडऩे की मांग के समर्थन में कम से कम एक लाख पोस्टकार्ड भेजने का है।           
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प्रधानमंत्री से की गई अपील
उन्होंने कहा कि देश में भयंकर बेरोजगारी और महंगाई फैली है। पोस्टकार्ड के जरिये प्रधानमंत्री से अपील की जा रही है कि जितना धन सीएए, एनआरसी और एनपीआर (NPR) को लागू करने में खर्च किए जाएंगे उसे बेरोजगारी घटाने, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं, महिलाओं को सुरक्षा और परेशानहाल किसानों को राहत देने पर खर्च किया जाए।       

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