भीम आर्मी ने पहले शवों को उठाने से किया इंकार, बाद में मानी

  • Updated on 2/9/2019

रुड़की/ब्यूरो। आज सिविल अस्पताल में भीम आर्मी की बढ़ी सक्रियता के कारण गहमा गहमी का माहौल बना रहा। मामला तब बढ़ गया जब भीम आर्मी ने शवों को उठाने से इनकार कर दिया। इस दौरान पुलिस प्रशासन के हाथ-पैर फूले रहे। भीम आर्मी और बसपा की मांग थी कि मृतकों के परिवारों को 10 लाख की आर्थिक सहायता व एक परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए। लेकिन, अंत में मामला सुलझ गया और परिजन शव लेकर वापस चले गए।

जहरीली शराब मामले में आज भीम आर्मी, बसपा और कांग्रेस के नेता पीड़ितों के बीच नजर आए। कोई मृतकों के घरों में तो कोई रुड़की अस्पताल में पीड़ित परिवारों से मिला। भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय और प्रदेश अध्यक्ष महक सिंह सुबह से शाम तक सिविल अस्पताल में रहे। उनकी मांग थी कि मृतकों के परिजनों को 10 लाख मुआवजा दिया जाए। उन्होंने मांग पूरी न होने तक शव भी नहीं उठने दिए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका और एसपी देहात ने उनसे बात की।

पीड़ित परिवार से एक व्यक्ति को मिले सरकारी नौकरी: हरीश रावत

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इन लोगों को ज्ञापन देने को कहा, लेकिन इन लोगों के साथ ही यहां मौजूद नेताओं की मांग थी कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपने स्तर से इस बाबत जिलाधिकारी व शासन को अवगत कराएं। इस बात को लेकर प्रशासन के साथ कार्यकर्ताओं की कई बार तीखी नोकझोंक हुई। कार्यकर्ताओं ने जाम लगाने की चेतावनी दी। किसी तरह पुलिस प्रशासन ने इन लोगों को समझाया। अंत में परिजन शव ले जाने पर अड़ गए और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।

चन्द्रशेखर रावण की आने की रही सूचना
रुड़की सिविल अस्पताल में भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर रावण के आने की सूचना मिलती रही। इस सूचना से जहां पुलिस प्रशासन की धड़कने बढ़ी रहीं, वहीं भीम आर्मी कार्यकर्ता भी जोश भरते नजर आए।

आपस में भिड़े बसपा और भीम आर्मी कार्यकर्ता
सिविल अस्पताल में उस समय माहौल गरमा गया जब भीम आर्मी और बसपा पदाधिकारी आपस में उलझ गए। भीम आर्मी पदाधिकारियों ने बसपा प्रदेश अध्यक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। तो दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक होने लगी। अंत में पुलिस ने बीच बचाव किया।

एएसडीएम से उलझे सीएमएस चक्रपाणि
सरकारी अस्पताल के सीएमएस चक्रपाणि ने आज पीड़ितों की सूची बनाए जाने को लेकर एएसडीएम के पेशकार जितेंद्र कपूर के साथ ही एक अन्य कर्मी के साथ भी दुर्व्यवहार किया। यहां तक कि शवों को ले जाने की बाबत सरकारी एम्बुलेंस देने से भी मना कर दिया। इस दौरान सीएमएस चक्रपाणि का एएसडीएम रविन्द्र सिंह से भी सही व्यवहार नहीं रहा। जिसको लेकर उनकी एएसडीएम से खासी नोकझोंक हुई। बाद में सीएमओ ने बीच में दखल दिया।

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