Monday, May 10, 2021
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भीमा कोरेगांव मामले की जांच NIA को सौंपने पर कांग्रेस-NCP ने की केंद्र सरकार की निंदा

  • Updated on 1/25/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र (Maharashtra) के बहुचर्चित भीमा-कोरेगांव केस (Bhima Koregaon Case) की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने के केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने आपत्ति जताई है। महाराष्ट्र कांग्रेस (Maharashtra Congress) ने शनिवार को केंद्र पर आरोप लगाया कि अचानक उठाया गया यह कदम भाजपा (BJP) की 'साजिश' की पुष्टि करता है। इसके अलावा राकांपा (NCP) ने भी आरोप लगाया कि केंद्र के कदम का मकसद महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के गलत कारनामों पर पर्दा डालना है।   

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कांग्रेस-राकांपा ने की निंदा
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने ट्वीट किया, "महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार द्वारा पुणे पुलिस की जांच की पुन: जांच कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद भीमा कोरेगांव दंगा मामले को अचानक एनआईए द्वारा अपने हाथ में लेना भाजपा की साजिश की पुष्टि करता है। एनआईए को इस मामले की जांच हाथ में लेने के लिए दो साल का वक्त क्यों लगा? कड़ी निंदा।"

उन्होंने कहा, "एनआईए को यह मालूम चलने में दो साल क्यों लगे कि यह मामला उसके अधिकारक्षेत्र के लिए उपयुक्त है। इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं।" राकांपा प्रवक्ता एवं राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) ने कहा कि यह राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के गलत कारनामों को छिपाने के लिए केंद्र का प्रयास है।

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NIA को सौंपने पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने जताई नाराजगी
इससे पहले महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उसने 2018 के कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की जांच को राज्य सरकार की सहमति के बिना एनआईए को स्थानांतरित कर दिया। मामले की जांच पुणे पुलिस (Pune Police) कर रही थी।

संविधान के खिलाफ है केंद्र का फैसला
देशमुख ने शुक्रवार शाम ट्वीट किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की नई सरकार ने 'मामले की तह तक' जाने का फैसला किया। इसके बाद केंद्र ने यह फैसला किया। राकांपा से जुड़े मंत्री ने कहा, "मैं इस फैसले की निंदा करता हूं। यह संविधान के खिलाफ है।"

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2018 का ममाला?
पुणे जिले में कोरेगांव -भीमा युद्ध स्मारक के पास एक जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। हर साल बड़ी संख्या में दलित यहां आते हैं। पुलिस ने दावा किया था कि पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद में भड़काऊ भाषणों के कारण हिंसा हुई। बाद में तेलुगू कवि वरवर राव और सुधा भारद्वाज सहित वामपंथी झुकाव वाले कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

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