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भीमा-कोरेगांव हिंसा केस: नोएडा में DU प्रोफेसर के घर महाराष्ट्र पुलिस की छापेमारी

  • Updated on 9/10/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।एलगार परिषद मामले में मंगलवार को पुलिस ने नोएडा निवासी डीयू के एक प्रोफेसर के घर पर छापेमारी की। जिस प्रोफेसर के घर पुलिस ने छापा मारा उनका नाम हनी बाबू बताया जा रहा है। हनी बाबू दिल्ली यूनिवर्सिटी में कई सालों से इंगलिश के प्रोफेसर हैं। वह नोएडा सेक्टर 78 स्थित हाइड पार्क सोसाइटी में रहते हैं। जानकारी मिलने पर पता लगा कि छापेमारी के दौरान हनी बाबू अपने घर पर ही थे।

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सूत्रों की जानकारी के मुताबिक डीयू प्रोफेसर के घर में छापेमारी के समय उनकी कुछ किताबें मिली है जिसका पंचनामा करवाकर पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है। इसके अलावा अन्य कुछ चीजें भी पुलिस अपने साथ ले गई है, हालांकि मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। 

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पुलिस ने बताया है कि छापेमारी के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। छापेमारी की टीम में डीसीपी क्राइम बच्चन सिंह, एसीपी शिवराज पंवार, साइबर एक्सपर्ट और अन्य लोग भी मौजूद थे। छापेमारी में नोएडा सेक्टर 49 थाना पुलिस और गौतमबुध नगर के एसएसपी वैभव कृष्ण ने महाराष्ट्र पुलिस को पूरा सहयोग दिया। पुलिस अधिक्षक वैभव कृष्ण ने बताया कि इस पूरे मामले में पुणे पुलिस छापेमारी करने आई थी। फिलहाल किसी को भी गिरफ्तार नही किया गया है।

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आपको बता दे वर्ष 2018 में भीमा कोरेगांव हिंसा में डीयू के इस प्रोफेसर का नाम सामने आया था। उस समय इस मामले में नक्सलियों का हाथ होने की बात सामने आई थी। जिसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने कई लोगों को नजरबंद भी किया था। हनी बाबू का नाम भी इस मामले में काफी चर्चा में रहा था। जिसके बाद मंगलवार दोपहर अचानक महाराष्ट्र पुलिस उनके नोएडा स्थित आवास पर छापेमारी करने पहुंची। 

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भीमा-कोरेगांव हिंसा एक जनवरी 2018 को हुई थी। भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ के दौरान नए साल के दिन पुणे में दलित समूहों और दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों के बीच संघर्ष हो गया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एलगार परिषद का आयोजन किया गया था। इस परिषद के दूसरे दिन भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी। हिंसा के लिए यलगार परिषद के आयोजन पर भी आरोप लगाया गया था।

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इसी दौरान मुंबई और कल्याण से कई माओवादी कार्यकर्ता पकड़े गए थे। जिनसे पूछताछ में भीमा कोरेगांव दंगे में माओवादी साजिश का पता चला था। नए साल के मौके पर महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई का जश्न मनाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया लेकिन ये कार्यक्रम हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। इस झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई और इलाके में तनाव बन गया। ये जश्न अंग्रेजों की जीत को लेकर मनाया गया था।

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