Wednesday, Apr 14, 2021
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सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से हटे भूपिन्दर मान, योगेंद्र यादव बोले- पहला विकेट गिरा!

  • Updated on 1/14/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह कृषि कानूनों पर किसानों और केंद्र के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति से अलग हो गए हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह के कमेंट देखने को मिल रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल योगेंद्र यादव ने कटाक्ष करते हुए ट्वीट में लिखा है, तो पहला विकेट गिरा।'

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योगेंद्र यादव आगे लिखते हैं, 'पहला विकेट गिरा! प्रोफेसर गुलाटी से भी ऐसा ही कदम उठाने की अपील करते हैं। वह इन तीनों कानूनों के बौद्धिक जनक हैं। हम मतभेदों पर सहमत हो सकते हैं। लेकिन, मैं सोचता हूं कि वह इससे सहमत होंगे कि इस मैच में अम्पायर नहीं हो सकते हैं, जहां उन्होंने बतौर खिलाड़ी भाग लिया है।' 

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इससे पहले मान ने कहा कि समिति में उन्हें सदस्य नियुक्त करने के लिए वह शीर्ष अदालत के आभारी हैं लेकिन किसानों के हितों से समझौता नहीं करने के लिए वह उन्हें पेश किसी भी पद का त्याग कर देंगे। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘खुद किसान होने और यूनिनन का नेता होने के नाते किसान संगठनों और आम लोगों की भावनाओं और आशंकाओं के कारण मैं किसी भी पद को छोडऩे के लिए तैयार हूं ताकि पंजाब और देश के किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो।’’ 

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मान ने कहा, ‘‘मैं समिति से अलग हो रहा हूं और मैं हमेशा अपने किसानों और पंजाब के साथ खड़ा रहूंगा।’’ उच्चतम न्यायालय ने तीन नये कृषि कानूनों को लेकर सरकार और दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे रहे किसानों की यूनियनों के बीच व्याप्त गतिरोध खत्म करने के इरादे से मंगलवार को इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाने के साथ ही किसानों की समस्याओं पर विचार के लिये चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। 

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पीठ ने इस समिति के लिये भूपिन्दर सिंह मान के अलावा शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घन्वत, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के नामों की घोषणा की थी। कानूनों के अमल पर रोक का स्वागत करते हुए किसान संगठनों ने कहा थ कि वे समिति के सामने पेश नहीं होंग। किसान संगठनों के नेताओं ने दावा किया था कि समिति के सदस्य ‘‘सरकार समर्थक’’ हैं। 

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जिन तीन नये कृषि कानूनों को लेकर किसान आन्दोलन कर रहे हैं, वे कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार, कानून, 2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) कानून, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून हैं। पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान इन कानूनों को निरस्त करवाने के लिए पिछले कई सप्ताह से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। 

 

 

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