Wednesday, Jan 20, 2021

Live Updates: Unlock 8- Day 19

Last Updated: Tue Jan 19 2021 10:42 PM

corona virus

Total Cases

10,596,107

Recovered

10,244,677

Deaths

152,743

  • INDIA10,596,107
  • MAHARASTRA1,994,977
  • ANDHRA PRADESH1,648,665
  • KARNATAKA931,997
  • KERALA911,382
  • TAMIL NADU831,866
  • NEW DELHI632,821
  • UTTAR PRADESH597,238
  • WEST BENGAL565,661
  • ODISHA333,444
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • RAJASTHAN314,920
  • JHARKHAND310,675
  • CHHATTISGARH293,501
  • TELANGANA290,008
  • HARYANA266,309
  • BIHAR258,739
  • GUJARAT252,559
  • MADHYA PRADESH247,436
  • ASSAM216,831
  • CHANDIGARH183,588
  • PUNJAB170,605
  • JAMMU & KASHMIR122,651
  • UTTARAKHAND94,803
  • HIMACHAL PRADESH56,943
  • GOA49,362
  • PUDUCHERRY38,646
  • TRIPURA33,035
  • MANIPUR27,155
  • MEGHALAYA12,866
  • NAGALAND11,709
  • LADAKH9,155
  • SIKKIM5,338
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS4,983
  • MIZORAM4,322
  • DADRA AND NAGAR HAVELI3,374
  • DAMAN AND DIU1,381
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
bhushan contempt case justice mishra say we do not prejudice anyone do not think rkdsnt

प्रशांत भूषण मामले में जस्टिस मिश्रा ने कहा- हम किसी के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखते

  • Updated on 8/25/2020


नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को आग्रह किया कि अदालत की अवमानना मामले में उनकी दोषसिद्धि निरस्त की जानी चाहिए और शीर्ष अदालत की ओर से ‘‘स्टेट्समैन जैसा संदेश’’ दिया जाना चाहिए। मामला न्यायपालिका के खिलाफ भूषण के दो ट्वीटों से जुड़ा है। अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (Justice Arun Mishra) की अध्यक्षता वाली पीठ से भूषण को माफ करने का भी आग्रह किया, जो अपने ट्वीटों के लिए बिना शर्त माफी मांगने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भूषण को ‘‘सभी बयान वापस लेने चाहिए और खेद प्रकट करना चाहिए।’’

भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना केस सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी पीठ को भेजा

पीठ ने 20 अगस्त को भूषण को सोमवार तक का समय दिया था और कहा था कि उन्हें अपने ‘‘अवमाननाकारी बयान’’ पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा अवमाननाजनक ट्वीटों के लिए ‘‘बिना शर्त माफी’’ मांगनी चाहिए। न्यायालय ने भूषण की सजा के मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर ली। पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल हैं। 

पुलवामा आतंकी हमला: NIA ने दायर किया 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र

भूषण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने पीठ से कहा, ‘‘यद्यपि अटॉर्नी जनरल ने भूषण को फटकार लगाने का सुझाव दिया है, लेकिन यह भी बहुत ज्यादा हो जाएगा। प्रशांत भूषण को शहीद न बनाएं। ऐसा नहीं करें। उन्होंने कोई हत्या या चोरी नहीं की है।’’ धवन ने भूषण के पूरक बयान का हवाला देते हुए कहा कि न सिर्फ इस मामले को बंद किया जाना चाहिए, बल्कि विवाद का भी अंत किया जाना चाहिए और शीर्ष अदालत की ओर से ‘‘स्टेट्समैन जैसा संदेश दिया जाना चाहिए।’’ 

PNB धोखाधड़ी मामला: नीरव मोदी की पत्नी के खिलाफ इंटरपोल का गिरफ्तारी वारंट

उन्होंने कहा, ‘‘मैं दो सुझाव देता हूं। दोषिसिद्धि के निर्णय को निरस्त किया जाना चाहिए और कोई सजा नहीं दी जानी चाहिए। मैं अपने मुवक्किल की ओर से बयान दे रहा हूं।’’ भूषण के बयानों और माफी मांगने से उनके इनकार का जिक्र करते हुए पीठ ने वेणुगोपाल से कहा कि गलती सभी से होती है, लेकिन ये स्वीकार की जानी चाहिए और भूषण इन्हें स्वीकार करने की इच्छा नहीं रखते। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘हमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहिष्णुता का भाव रखना चाहिए। हम आपसे (वकीलों) अलग नहीं हैं। हम भी बार से आए हैं। हम आलोचना के लिए तैयार हैं, लेकिन हम जनता में नहीं जा सकते।’’ 

अडाणी ग्रुप खरीद सकता है मुंबई एयरपोर्ट की 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी

आगामी दो सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘हम किसी के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखते। यह मत सोचो कि हम आलोचना सहन नहीं करते। बहुत सी अवमानना याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन हमें बताइए कि क्या कभी उन्हें दंडित किया गया है। यह दुखद है कि ऐसी चीजें ऐसे समय हो रही हैं जब मैं सेवानिवृत्त होने जा रहा हूं।’’ ट्वीटों को लेकर माफी न मांगने के रुख पर पुनर्विचार के लिए न्यायालय ने भूषण को 30 मिनट का समय दिया और बाद में भूषण को दी जाने वाली सजा पर धवन का रुख जानना चाहा। 

प्रशांत भूषण मामला - माफी मांगने में क्या गलत है, क्या यह बहुत बुरा शब्द है : सुप्रीम कोर्ट

उन्होंने कहा कि वह वेणुगोपाल के इस विचार से सहमत नहीं हैं कि भूषण को झिड़की लगाई जानी चाहिए क्योंकि यह काफी बड़ा दंड होगा और इसके अतिरिक्त यह कि, भूषण ने कोई हत्या या चोरी नहीं की है, तथा इस तरह की कोई भी सजा उन्हें ‘‘शहीद बनाने’’ का काम करेगी। भूषण के माफी मांगने से इनकार करने पर न्यायालय ने कहा कि माफी मांगने में क्या गलत है, क्या यह बहुत बुरा शब्द है। वेणुगोपाल ने कहा कि मामले में न्यायाधीश तीसरा पक्ष हैं, जिनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं और अदालत ने उन्हें नहीं सुना है। 

पीठ ने पूछा, ‘‘पहली बात तो यह है कि इस तरह के आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं।’’ इसने कहा कि न्यायाधीश स्वयं का बचाव नहीं कर सकते और यह अटॉर्नी जनरल हैं, जिन्हें व्यवस्था की रक्षा करनी होगी। वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ऐसी झिड़की ठीक नहीं होगी कि दोबारा ऐसा न करें।’’ शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को न्यायालय की अवमानना के मामले में भूषण को दोषी ठहराया था। भूषण को इस मामले में छह महीने तक की साधारण सजा या दो हजार रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजा हो सकती हैं।

 

 

कोरोना से जुड़ी बड़ी खबरों को यहां पढ़ें...

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.