Friday, Jan 24, 2020
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भूटान कर रहा है अपनी नीति में बदलाव, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर

  • Updated on 11/30/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। भूटान (Bhutan) अब अपने पर्यटन नीति में बदलाव करने जा रहा है। अब तक भूटान भारत (India), बांग्लादेश (Bangladesh) और मालदीव (Maldives) से जाने वाले पर्यटकों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया करता था। लेकिन भूटान में अब पर्यटकों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए इन देशाों के पर्यटकों से भी शुल्क लिया जाएगा। इसके चलते दिल्ली में भूटान के विदेश मंत्री तांजी दोर्जी  (Foreign Minister Tanji Dorjee) ने भरतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Subrahmanyam Jaishankar) से मुलाकात की है। 

दरअसल भूटान में इस मसौदे को पर्यटन परिषद ने तैयार किया है। टीसीबी के महानिदेशक दोरजी धराधुल (Dorji Dharadhul) ने कहा कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या भूटान के लिए ठिक नहीं है। साल 2018 में 2.74 लाख पर्यटक भूटान गए थे जिसमें से 1.80 लाख भारतीय थे। बताया जा रहा है कि भूटान की नई पर्यटन मसौदे के अुनसार अब पर्यटकों को सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस और परमिट फीस देनी होगी। 

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आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की नीति
अर्थव्यवस्था को मजबूती देन के लिए किसी देश की पर्यटन क्षेत्र अहम भूमिका निभाता है। इसी के चलते भूटान ने अपने पर्यटन स्थलों की मुद्रा अर्जन क्षमता को समक्षते हुए एक नई पर्यटन नीति को अंतिम रुप देने का निर्णय लिया है। जिसमें भूटान ने निर्णय लिया है कि जिन देशों से अभी तक शुल्क नहीं लिया जाता था उन्हें अब भूटान के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने पर एक निश्चित शुल्क चुकाना होगा। जिसमें शासतौर पर एशियाई देशों में भारत और बांगलादेश आता है। 

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2018 में 58.41 मिलियन डॉलर की हुई थी कमाई
नई पर्यटन नीति के अनुसार अब भूटान दक्षिण एशियाई देशों, भारत, बांग्लादेश और मालदीव से भूटान आने वाले पर्यटको को अन्य देशों के विदेशी यात्रियों के समान ही प्रति यात्री 250 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से अदा करना होगा। जिसमें प्रतिदिन 65 डॉलर सस्टेनेबल डेवलपमेंट फी और 40 डॉलर वीजा शुल्क भी शामिल है।

साल 2018 में भूटान को पर्यटन से कुल 58.41 मिलियन डॉलर की राशि प्राप्त हुई थी। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि भूटान पर्यटकों के लिए भीड़-भाड़ वाली जगह बनता जा रहा है। साथ ही लोग ज्यादा पैसा खर्च करके आते है और शिकायत रहती है कि उन्हे होटल और सुविधाओं के लिए दिक्कत होती है वहीं भारत और मालदीव, बांग्लादेश के पर्यटकों को होटल और अन्य सुविधाएं सस्ते दामों में आसानी से मिल जाते हैं। 

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500 नगुलट्रम का शुल्क लगाकर की जा सकती है शुरूआत
भूटान के बेचत आयोग के अनुसार 500 नगुलट्रम का शुल्क लगाकर इसकी शुरूआत की जा सकती है। जिससे 425 मिलियन नगुलट्रम की राजस्व प्राप्ति होगी। इसके साथ ही सभी देशों के पर्यटकों को शुल्क के दायरे में लाकर इस देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की सिफारिश भी बेतन आयोग द्वारा किया गया था। 

टूरिज्म काउंसिल ऑफ भूटान की एक रिपोर्ट के अनुसार भूटान की यात्रा करने वाले चीनियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। साल 2016 में चीन से यहां 9,220 पर्यटन आए। हालांकि डोकलाम संघर्ष के बाद संख्या गिरकर 6,421 ही रह गई, इसके साथ ही अन्य कारण भी रहे हैं। 

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भारत और भूटान के संबंध
भूटान दक्षिण एशिया में भारत का सबसे विश्वनियीय मित्र रहा है। इसके साथ ही भारत भूटान के विकास के लिए अहम योगदान करता रहा है। लेकिन यहां देश की आर्थिक स्थिति के लिए जरूरी हो जाता है कि भूटान इसके वैकल्पिक साधनों को तालाशे जो कि कोई भी देश करेगा।

साल 2007 में इस संधि के समिक्षा कर भूटान को स्वतंत्र विदेश नीति भी संचालित करने के लिए भारत ने बढ़ावा दिया। दोनों देशों के बीच 1968 से कुटनीतिक संबंध है जो आज भी मजबूत स्थिति में है। 

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भारत की ओर से भूटान को मदद
28 दिसंबर 2018 को नवनिर्वाचित भूटानी प्रधानमंत्री डॉ. लोतेय शेरिंग भारत की यात्रा पर आए थे और इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान की बारहवीं पंचवर्षिय योजना के लिए 4,500 करोड़ रुपये की मदद देने की घोषणा किया था। वहीं ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए भी भारत ने इतनी ही धनराशि भूटान को दी थी।

भूटान का स्वयं कहना है कि 1971 में भारत के प्रयासों से ही उसे संयुक्त राषिट्र की सदस्यता मिली थी। वहीं भारत, भूटान का अंतरराष्ट्रीय मुद्र कोश में भी प्रतिनिधित्व करता है। बता दें कि भारत भूटान संबंधों की नींव साल 1949 में मैत्री और सहयोगी संधि के जरिये रखी गई थी। जिसमें कहा गया है कि भूटान आंतरिक मामलों में तो स्वतंत्र होगा, लेकिन विदेश मामलों में भारत के मार्गदर्शन और निर्देशन में काम करेगा।   

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