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big quarantine scam happened in bihar says yashwant sinha in exclusive interview aljwnt

Exclusive: बिहार में बड़ा क्वारंटीन घोटाला हुआ- यशवंत सिन्हा

  • Updated on 6/30/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 2018 में दलगत राजनीति से संन्यास लेने वाले पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमले करते हुए कहा कि नीतीश बाबू सुशासन बाबू के रूप में जाने जाते हैं और दावा किया जाता है कि उन्होंने पिछले 15 साल में बिहार की स्थिति पूरी तरह बदल दी है। जबकि विस्तार में गया तो पाया कि पिछले 15 साल में बिहार हर क्षेत्र में नीचे ही गिरा है। उन्होंने कहा- ये जो सुशासन की बातें हैं, ये कोरी बकवास हैं। जहां तक मानव संसाधन विकास की बात है तो बिहार पिछले 27 साल में देश में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। कोई भी तरक्की नहीं हुई है। पढ़िए पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स से हुई यशवंत सिन्हा की ये खास बातचीत।

सवाल: राष्ट्रीय राजनीति में लंबा वक्त गुजारने के बाद अब बिहार में थर्ड फ्रंट बनाने का विचार कैसे आया?
जवाब: 2014 में मैंने चुनावी राजनीति से और 2018 में दलगत राजनीति से संन्यास ले लिया था। मगर अब महापलायन में प्रवासी मजदूरों की हालत देखकर मन बहुत द्रवित हुआ है। नीतीश बाबू सुशासन बाबू के रूप में जाने जाते हैं और दावा किया जाता है कि उन्होंने पिछले 15 साल में बिहार की स्थिति पूरी तरह बदल दी है। तब ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई यह जानने के लिए मैं बिहार गया। जब मैं विस्तार में गया तो पाया कि पिछले 15 साल में बिहार हर क्षेत्र में नीचे ही गिरा है। ये जो सुशासन की बातें हैं, ये कोरी बकवास हैं। जहां तक मानव संसाधन विकास की बात है तो बिहार पिछले 27 साल में देश में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। कोई भी तरक्की नहीं हुई है। आप कोई भी क्षेत्र ले लीजिए, चाहे वह इन्फ्रास्ट्रक्चर का हो, चाहे गरीबी हो, चाहे रोजगार का हो, शिक्षा का हो, स्वास्थ्य का हो, चाहे भ्रष्टाचार की बात हो। हर मामले में बिहार की स्थिति दयनीय होती गई है। सीबीआई तीन साल से सृजन घोटाले की जांच कर रही है। सिर्फ एक क्लेक्टर पर सारा मामला डालकर वित्तमंत्री सुशील मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बचाया गया। लालूराज के चारा घोटाले में अलॉटमेंट से ज्यादा पैसा ट्रेजरी से निकाला गया था। लालू मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री भी थे, इसलिए इस घोटाले का आरोप सीधा उन पर आया कि उन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया था। मगर सृजन घोटाले में क्या हुआ? बिहार में दस साल तक ट्रेजरी से सारा पैसा निकल जाता था। न तो वित्तमंत्री और ना ही मुख्यमंत्री ने इस लूट पर ध्यान दिया। इसके बावजूद सीबीआई ने अभी तक न तो वित्तमंत्री सुशील मोदी और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका आरोपी बनाया है। 15 दिन तक मेरी लोगों से चर्चा हुई। सबने यही कहा कि अगर आपके नेतृत्व में फ्रंट बने तो बिहार के सब लोग आपके साथ आएंगे। कोई नई पार्टी नहीं बना रहे। एक फ्रंट बनेगा और हम लोग चुनाव लड़ेंगे। 

सवाल: बिहार में प्रवासी मजदूरों के लिए काम की और उनके क्वारंटीन सेंटरों की स्थिति में आप क्या देख रहे हैं?
जवाब: सृजन घोटाले की तरह आजकल बिहार में दो और घोटालों की चर्चा होती है। इनमें एक है क्वारंटीन घोटाला और दूसरा एस्टीमेट घोटाला। हमें लोगों ने बताया कि जो लोग क्वारंटीन सेंटर चला रहे थे वे लोगों से सुबह ही कह देते थे कि अपने घर जाओ, खाओ-पिओ मगर शाम को सोने के लिए यहां आ जाना। अब तो ये सेंटर बंद हो गए हैं मगर सबने देखा कि वहां क्या-क्या हुआ। वहां मजदूरों की स्थिति क्या थी। बिहार की आज हालत यह है कि जहां भी हाथ डालो वहीं घोटाला है। अब बहुत से मजदूर काम के लिए दूसरे राज्यों के लिए फिर से जाना शुरू हो गए हैं। उन सबका यही कहना है कि उन्हें बिहार में कोई रोजगार नहीं मिला। इसलिए वापस जाने को मजबूर हैं। 2005 में नीतीश ने वादा किया था कि बिहार के मजदूर बाहर काम करने नहीं जाएंगे मगर आज भी 40 लाख लोग काम के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं। 

सवाल: बिहार निचले पायदान पर है तो क्या इसके लिए लालू जिम्मेदार हैं या नीतीश भी कुछ नहीं कर पाए? 
जवाब: पिछले 27 साल की बात मैंने की है और इनमें पिछले 15 साल से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। लालू ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह सुशासन बाबू हैं। नीतीश यह दावा करते हैं। अगर सुशासन है तो पिछले 15 साल से तरक्की क्यों नहीं हुई। वादे पूरा करने के लिए सरकार को पांच साल मिलते हैं। नीतीश को तो 15 साल मिले हैं। अब कहते हैं कि पांच साल और दो। क्या उन्हें वादे पूरा करने के लिए अनंतकाल का समय चाहिए।

सवाल: नीतीश कुमार कहते हैं कि उन्होंने कानून व्यवस्था ठीक की है। शराबबंदी की है। क्या लोग उन पर भरोसा नहीं करेंगे?
जवाब: अब लोगों का भरोसा नीतीश कुमार से उठ गया है। विधि व्यवस्था भी बिहार की चौपट है। लालूराज में जंगलराज, यह नया नहीं है। चाहे केंद्र में हो या राज्य में, ये लोग पुरानी बातें ही उठाते हैं। यह नहीं बताते कि 15 साल में इन्होंने क्या किया। नीतीश कुमार पर सबसे बड़ा आरोप तो यह है कि उन्होंने 2015 में मिले जनादेश का अनादर किया। वह भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़े। लालू की पार्टी से गठबंधन किया मगर दो साल बाद इस गठबंधन को तोड़ दिया, नया चुनाव नहीं कराया।

सवाल: क्या नीतीश कुमार फिर जंगलराज के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ेंगे?
जवाब: हां लड़ेंगे। उनके पास तो एक ही मुद्दा है कि जंगलराज वापस न आए। हम जो विकल्प देने जा रहे हैं, उस पर क्या आरोप लगाएंगे। मगर वे चाहेंगे कि पूरे चुनाव को दो खेमों में बांट दो और उनकी गलतियों को बताकर चुनाव जीत लो। मगर हम इसबार नीतीश और भाजपा के इन इरादों को चुनौती देंगे। इसलिए मैं बिहार में डटा हुआ हूं। 

सवाल: आपका ब्लूप्रिंट क्या है, जिस पर लोग कहें कि वे आपके साथ हैं?
जवाब: ब्लूप्रिंट हम रखेंगे और इसकी तैयारी चल रही है। हम कोरे वादे नहीं करेंगे। हम पूरी योजना रखेंगे कि तीन महीने में कौन सा काम होगा, छह माह में कौन सा काम होगा और एक साल में कौन सा। हमारा विजन दस्तावेज अभी तैयार हो रहा है। 

सवाल: क्या राजद से गठजोड़ हो सकता है?
जवाब: हम एक फ्रंट बना रहे हैं और जो भी इससे जुडऩा चाहते हैं उनका स्वागत है। हम चाहेंगे कि ज्यादा लोग इससे जुड़ें मगर बाहुबली और गुंडातत्वों से कोई समझौता नहीं होगा। 

सवाल: क्या बिहार की राजनीति में यह संभव है कि बाहुबली लोग किसी पार्टी से न जुड़ें?
जवाब: हां संभव है और हम ये करके दिखाएंगे। बिहार की जनता ने पहले भी बाहुबलियों और गुंडातत्वों को हराया है। बिहार की जनता को कम करके न आंकें।  

सवाल: क्या चिराग पासवान से भी आपकी बात हुई है?
जवाब: चिराग पासवान और उनके दल से अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। अगर उनकी ओर से कोई पहल होती है तो हम विचार करेंगे।

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