Tuesday, Sep 28, 2021
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Bihar covid guidelines issued on Eid-ul-Azha Namaz cannot be offered at Gandhi Maidan prshnt

बिहार: ईद-उल-अजहा पर कोविड गाइडलाइंस जारी, गांधी मैदान में नहीं पढ़ी जा सकेगी नमाज

  • Updated on 7/20/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में कोरोना के दूसरी लहर भले ही कमजोर पड़ने लगा है लेकिन तीसरे लहर से सावधानी के लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है। वहीं  कोरोना महामारी के बीच 21 जुलाई को देशभर में बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में प्रसाशन अलर्ट पर हैं। देश के कई शहरों समेत पटना में ईद को लेकर गाइडलाइंस जारी कि गई है। यहां ईद की नमाज गांधी मैदान में नहीं पढ़ी जा सकेगी। जिला प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक जगहों पर ईद की नमाज पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने साफ किया है कि ईदगाह, मस्जिद और सार्वजनिक जगहों पर नमाज अदा करने पर रोक रहेगी। साथ ही लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें घर पर ही ईद की नमाज पढ़ने को कहा गया है।

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करीब 50 फीसदी तक मंहगा हुआ बकरा
वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस की घातक दूसरी लहर का असर ईल-उल-अज़हा के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी में लगने वाली बकरा मंड़ियों पर पड़ा है। लॉकडाउन में आम लोगों की आदमनी घटी है जबकि महंगाई, खास कर पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों के कारण दूर दराज के इलाकों से बकरों को दिल्ली लाने की लगात में इजाफा हुआ है, और बकरा पिछले साल की तुलना में करीब 50 फीसदी तक मंहगा हो गया है। महामारी की संभावित तीसरी लहर को रोकने के लिए दिल्ली में प्रशासन सख्ती बरत रहा है।

ऐसे में पुरानी दिल्ली, सीलमपुर और ओखला समेत अन्य इलाकों में बकरा मंडियों का स्वरूप पिछले सालों जैसा नहीं है। इस बार जानवर कम भी आए हैं, और महंगे हैं। बकरीद बुधवार को मनाया जाएगा। उस दिन मुस्लिम बकरे, दुंबे और अन्य जानवरों की कुर्बानी करते हैं।

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कई महिनों तक बंद रही है दुकाने
सीलमपुर में सड़क किनारे लगी मंडी में आए बरेली के आशु ने कहा, बाजारों को लेकर प्रशासन सख्त है, इसलिए हमने बकरे सस्ते में बेच दिए हैं। हमें घाटा हुआ है। लॉकडाउन में पहले ही हमारी मांस की दुकान कई महीनों तक बंद रही जिस वजह से हमें आर्थिक तौर पर खासी परेशानी हुई, सोचा था कि बकरे बेचने से कुछ कमाई हो जाएगी, लेकिन इसमें भी घाटा हो गया।” आशु हर साल ईद-उल-अज़हा के मौके पर व्यापार के लिए 30-40 बकरे लेकर दिल्ली के जाफराबाद व सीलमपुर आया करते थे। इस बार वह सिर्फ आठ बकरे ही लेकर आए हैं।

दिलशाद गार्डन के रहने वाले जावेद ने 8700 रुपये का बकरा खरीदा है। उनका कहना है कि पिछले साल की तुलना में बकरा इस बार काफी मंहगा है। फर्नीचर का काम करने वाले जावेद बताते हैं, लॉकडाउन की वजह से पिछले साल और इस साल कई महीनों तक मेरी दुकान बंद रही, जिसका असर कुर्बानी के मेरे बजट पर पड़ा है। मैं अक्सर दो-तीन बकरे खरीदता था, लेकिन इस बार सिर्फ एक ही जानवर खरीदा है।

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