Thursday, Jun 30, 2022
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Bdy Spl- ग्रैमी अवार्ड जीत चुके उस्ताद जाकिर हुसैन, जिनके तबला वादन की दीवानी है दुनिया

  • Updated on 3/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वो जब तबला बजाते हैं तो फिर कुछ नहीं बजता, मोर नाचना बंद कर देते हैं, कोयल गाना बंद कर देती है। हकीकत तो ये है कि जब वो तबला बजाते हैं तो न ही कोई कुछ देखना चाहता है न ही कुछ सुनना। आप बिल्कुल ठीक समझ रहे हैं जनाब, बात अगर तबले की है तो तारीफों के इतने पुल केवल तबला वादक जाकिर हुसैन जैसी शख्सियत के संबंध में ही बांधे जा सकते हैं। आज 'तबला सुल्तान' जाकिर हुसैन का 67वां जन्मदिन है।

हो सकता है कि आप भी उन लोगों की जमात में शामिल हों, जो अपनी 'फिरस्टेसन' व्हॉट्सएप और फेसबुक पर निकालकर अपना जीवन गुजार रहे हैं और जिन्हें जाकिर हुसैन जैसी हस्ती से कोई सरोकार ही नहीं। लेकिन यकीन मानिए अगर एक बार जाकिर साहब को तबला बजाते देख लेंगे तो उनके दीवाने हो जाएंगे। 

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मुंबई में पैदा हुए जाकिर हुसैन ने सेंट जेवियर्स कॉलेस से पढ़ाई की। वह मशहूर तबला वादक कुरैशी अल्ला रक्खा खान के पुत्र हैं। मात्र 11 साल की उम्र में अमेरिका में उन्होंने अपना पहला कॉन्सर्ट किया। साल 1990 में 'ताज महल' चाय का वह विज्ञापन तो आपको याद ही होगा, जिसमें जाकिर साहब ने जबरदस्त तबला बजाया था।

वर्ष 1974 में उस्ताद जाकिर हुसैन ने जैज गिटार वादक जॉन मैकलाफ्लिन, वायोलिनिस्ट (वायलिन वादक) एल. शंकर, मृदंग वादक रामनद राघवन और घटम बजाने वाले उस्ताद विक्कु विनायकराम के साथ ‘शक्ति’ के माध्यम से संगीत की एक अलग दुनिया बनाई थी।

‘शक्ति’ में दक्षिण भारतीय संगीत, हिंदुस्तानी और पश्चिमी संगीत का मिला-जुला रूप था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उस्ताद जाकिर हुसैन हर साल 200 से ज्यादा शो करते हैं। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश बचा हो, जहां जाकिर हुसैन ने अपनी पर्फोर्मेंस न दी हो। वे जहां भी गए लोगों को अपने अनोखे तबला वादन से दीवाना बनाते चले गए। 

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जाकिर हुसैन को पद्म श्री, पद्म विभूषण और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। साल 1992 में 'द प्लेनेट ड्रम' और 2009 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' के लिए 2 ग्रैमी अवार्ड भी मिले। जाकिर हुसैन बिल लाउसवैस के ग्लोबल म्यूजिक सुपरग्रुप 'तबला बीटसाइंस' के संस्थाक सदस्य भी हैं। आज जाकिर हुसैन ने अपने तबला वादन से विश्वभर में भारत का मान बढ़ाया है। शास्त्रीय संगीत में दिए गए उनके अमूल्य योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।

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