Saturday, Jun 23, 2018

BJP ने पूछा- अखिलेश यादव ने बंगले की दीवार के पीछे क्या छिपाया था?

  • Updated on 6/13/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के खाली किए गए बंगले को लेकर यूपी में सियासत गर्म हो गई है। बंगले में तोड़फोड़ और चीजें गायब होने को जहां यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गंभीरता से लिया है, वहीं अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के नेताओं को सफाई देनी पड़ रही है। 

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अखिलेश यादव का कहना है कि बंगले में उन्होंने अपने पैसों से कुछ चीजें बनवाई थीं और इसको लेकर सियासत करना ठीक नहीं हैं। इसके जरिए भाजपा उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। इसको लेकर अब भाजपा सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पलटवार किया है। 

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सिंह ने कहा, 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। वह करते हैं कि उन्होंने अपने पैसों से बंगले का रनोवेशन किया था। इनकम टैक्स की गणना होनी चाहिए, अगर सब कुछ ठीक है तो कोई बात नहीं। वैसे उन्हें खुद ही बताना चाहिए कि उन्होंने कितना पैसा लगाया और यह पैसा उन्होंने कहां से अर्जित किया।' 

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सिद्धार्थनाथ आगे कहते हैं, 'मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि आप एक सम्मानीय नेता और पूर्व सीएम हैं। साथ ही पढ़े-लिखे भी हैं। लेकि, जहां आप रहे हैं, उस घर की दीवार को तोड़ा गया है। दीवार के पीछे क्या छिपाया गया था कि आपको दीवार को ढहाना पड़ा?'

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राज्यपाल ने लिखा योगी को खत 
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सीएम योगी को पत्र लिखकर कहा कि अखिलेश यादव के खाली किए गए  सरकारी आवास में तोड़फोड़ के प्रकरण में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। राजभवन के प्रवक्ता का कहना है कि राज्यपाल ने खत में जिक्र किया, 'अखिलेश यादव को 4, विक्रमादित्य मार्ग पर आवंटित आवास को खाली किए जाने से पहले उसमें की गई तोडफ़ोड़ मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।'

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पत्र में कहा गया, 'यह एक बेहद गलत और गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित किए गए शासकीय आवास राज्य सम्पत्ति के कोटे में आते हैं, जिनका निर्माण और रख-रखाव सामान्य नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के करों से होता है।'

उन्होंने कहा कि राज्य सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विधि अनुसार समुचित कार्यवाही की जाए। राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उपरान्त उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य सरकार द्वारा आवंटित आवासों को खाली किए जाने के प्रकरण का स्वत: संज्ञान लेते हुए आज राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकारियों को बुलाकर जानकारी ली। 
 

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