Monday, Jan 21, 2019

शिवराज, रमन सिंह, वसुंधरा को शाह ने प्रादेशिक सियासत से किया दूर

  • Updated on 1/10/2019

नई दिल्ली (सुनील पाण्डेय)। भारतीय जनता पार्टी को जिन चेहरों के कारण हिंदी पटटी के तीन बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्तान में सत्ता से हाथ धोना पड़ा, उन तीनों चेहरों को पार्टी नेतृत्व ने  'राज्य बदर' कर दिया है।

आलोक वर्मा को हटाने पर कांग्रेस बोली- जांच से डरे हुए हैं पीएम मोदी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को राष्ट्रीय परिषद के ठीक कुछ घंटे पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का जो फैसला हुआ है, वह खुद ऐसा ही संकेत है। पिछले महीने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शिवराज सिंह चौहान द्वारा राज्य में ही जमे रहने का दम्भ भरा गया था। 

PM के नेतृत्व वाली सेलेक्ट कमेटी ने की वर्मा की छुट्टी, नागेश्वर होंगे अंतरिम CBI चीफ

यहां तक की उन्होंने आभार यात्रा निकालने तक का ऐलान कर दिया था। लेकिन, उनकी इस घोषणा को केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी नहीं मिली। इसके अलावा तीनों राज्यों में नेता प्रतिपक्ष बनाने का जो फैसला हुआ उससे भी साफ हो गया था कि तीनों पूर्व मुख्यमंत्री को राज्य की राजनीति से दूर होना पड़ सकता है।

शीला को फिर दिल्ली कांग्रेस की कमान, AAP के खिलाफ खोलेंगी मोर्चा 

  दरअसल, भाजपा नेतृत्व 3े महीने बाद होने जा रहे लोकसभा के आम चुनाव में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी नेतृत्व मान रहा है कि विधानसभा चुनाव के जो नतीजे आए हैं उसके नकारात्मक परिणाम के कारण यही चेहरे हैं। इसलिए उनको राष्ट्रीय टीम में लेकर चुृनाव के दौरान किसी अन्य राज्य में डयूटी सौंपी जा सकती है। मतलब लोकसभा चुनाव में ये तीनों क्षत्रप या तो राज्य से दूर रहेंगे, या फिर लोकसभ चुनाव का उम्मीदवार बनाकर उन्हें सिर्फ एक लोकसभा क्षेत्र में सीमित कर दिया जाएगा। 

CBI मामले में स्वामी बोले- फर्जी कानूनी जानकारों की बात नहीं सुनें PM मोदी

सूत्रों की माने तो तीनों राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री हाईकमान की नजरों में पहले से ही खटक रहे थे। यही कारण है कि बीच-बीच में उन्हें बदलने की भी चर्चाएं कई बार उठीं, लेकिन वह अंगद की तरह पैर जमाए बैठे रहे। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी अपने आतंरिक सर्वे में तीनों राज्यों की हालात खराब बताई थी, साथ ही चेहरों को बदलने का संकेत भी दिया था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 

राकेश अस्थाना मामले की जांच से CBI अधिकारी ने खुद को किया अलग

आखिरकार इसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भाजपा को भुगतना पड़ा। तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व ने इनकी नहीं सुनी और इसका पत्ता साफ करते हुए अपने हिसाब से नेताओं का चयन किया। इस चयन के बाद ही तीनों राज्यों में लगने लगा था कि अब पार्टी नेतृत्व इन्हें मध्य  प्रदेश,छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में रखने के मूड में नहीं है। वीरवार की देर शाम पार्टी हाईकमान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए तीनों को राज्य से बाहर कर दिल्ली बुला लिया।

#CBI मामले में मल्लिकार्जुन खड़गे ने CVC जुड़े दस्तावेज मांगे

सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश से पहले ही प्रभात झा पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनका दायरा पहले ही सीमित कर दिया गया है। लिहाजा, माना यह जा रहा है अब उनका पत्ता साफ भी हो सकता है।  
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.