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BJP के कद्दावर नेता थे अरुण जेटली, सफल रणनीतिकार के तौर पर किए जाएंगे याद

  • Updated on 8/25/2019

नई दिल्ली/ कुमार आलोक भास्कर। बीजेपी में अगर अटल- आडवाणी युग के बाद के 'सेकेण्ड जेनरेशन लीडर' की बात जब कभी की जाएगी तो सबसे अरुण जेटली सबसे ऊपर रहेंगे। एक प्रभाववशाली वक्ता, कुशल मंत्री, सफल रणनीतिकार के तौर पर जेटली को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अटल सरकार से लेकर मोदी सरकार तक महत्वपूर्ण मंत्री पद को नवाजा। उन्होंने 21 वीं सदी के new india को बनाने में भी योगदान दिया। 

बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शामिल अरुण जेटली भले ही एक भी लोकसभा चुनाव नहीं जीते हो लेकिन 90 के दशक से ही पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में अथक मेहनत किया। जिसका नतीजा रहा कि भगवा पार्टी केंद्र में भी सरकार बनाने में सफल रही है।

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अरुण जेटली का जन्म 28 दिसम्बर 1952 को दिल्ली में ही हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, दिल्ली से की। उसके बाद श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दिल्ली से स्नातक की। इसी दौरान दिल्ली विश्वविधालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे। जहां से वे एभीबीपी से जुड़े। उसके बाद 1980 में बीजेपी से जुड़ने के बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। जल्द ही जेटली अटल बिहारी और लालकृष्ण आडवाणी के चहेते बन गए। जेटली पर पार्टी ने भी भरोसा जताया। उनके तार्किक विचार के कायल तो अटल बिहारी भी रहे। एक होनहार, विचारवाण जेटली को हमेशा शालीन व्यवहार के लिए भी याद किया जाएगा।

जब 1998 में केंद्र में वाजपेयी सरकार बनी तो युवा अरुण जेटली को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री बनाया गया। उसके बाद उन्होंने अनेक मंत्रालय संभाले। पूर्व पीएम अटल बिहारी ने अपने मंत्रालय में फेरबदल करते हुए जेटली को पदोन्नति करते हुए कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री बनाया। वाजपेयी ने उन्हें 2003 में उद्योग मंत्री भी बनाया। यह साबित करता है कि जेटली का कद हमेशा अपने समकक्ष नेताओं से ऊपर रहा।  

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लेकिन जब 2004 में बीजेपी की लोकसभा में हार हो गई तो पार्टी ने उन्हें महासचिव बनाया। जेटली पार्टी के ट्रबुलशूटर के तौर पर पार्टी में कार्य करते रहे। फिर वो पार्टी के विस्तार की बात हो या नए साथी को गठबंधन से जोड़ने की हो, अरुण जेटली पर हमेशा से शीर्ष नेताओं ने भरोसा जताया। यहां तक कि कई बार सरकार को लेकर जनता के बीच छवि बनाने के लिए भी जेटली को आगे कर दिया जाता था। वे अपने तर्क से विरोधी को तो धराशायी कर ही देते थे। साथ ही देश की जनता में पार्टी और सरकार को लेकर सारी संशय को दूर करने में कामयाब हो जाते थे।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उनके किये कार्य को भला कौन भूल सकता है। जब देश में टीवी घर-घर पहुंच रही थी तो जेटली ने बहुत ही चतुराई से पार्टी के नीतियों को रखने में अग्रणी भूमिका निभाई।

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फिर जब 2013 में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के पक्ष में जोरदार ढ़ंग से पार्टी के भीतर आवाज मुखर की। जिसका परिणाम यह रहा कि पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को पीएम केंडिडेट घोषित किया। वे मोदी सरकार के भी प्रमुख सिपहसालार रहे। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वे देश के वित्त मंत्री रहे। लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शामिल होने इनकार कर दिया था। कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था।

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