Sunday, Dec 05, 2021
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चीन के LAC से पीछे हटने के प्रस्ताव पर सुब्रमण्यम स्वामी की चेतावनी, कहा- हो सकते है खतरनाक अंजाम

  • Updated on 11/12/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्वी लद्दाख में हुई भारत और चीन के बीच की खूनी झड़प के बाद से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एलएसी पर पिछले छह महीने से तनाव जारी है। इस बीच कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन अपनी सेनाओं सहित पैंगोंग सो और अन्य विवाद वाली जगहों से पीछे हटाने के लिए सहमत हो गया हैं। इन जगहों से भारत भी पीछे हटने को तैयार हुआ है। 

हालांकि अभी तय नहीं हो पाया है कि इस पूरी प्रक्रिया को कैसे अंजाम कैसे दिया जाएगा। इस समझौते को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी ने भारत और चीन के बीच होने वाले किसी भी तरह के समझौते पर अपनी चिंता जताई है। 

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स्वामी ने इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा है कि अगर सीमा विवाद पर चीन और पाकिस्तान नहीं झुके तो क्या? 

इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा है, चीनी सेना (PLA) के पैंगोंग लेक से पीछे हटने के प्रस्ताव के खतरनाक अंजाम हो सकते हैं, क्योंकि भारत ने उसके ऊपरी हिस्से पर कब्जा किया हुआ है, जबकि पीएलए ने नीचे मैदानी इलाके पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा है कि असली वापसी तब मानी जाएगी, जब पीएलए डेपसांग को जैसा है वैसा ही छोड़ दे। वहां चीनी सेना की मौजूदगी अस्वीकार्य है।

बता दें स्वामी का ट्वीट तब आया है जब 6 नवंबर को लद्दाख के चुशुल में बैठक हुई थी और इसमें दोनों सेनाओं ने पीछे हटने के बारे में फैसला लिया है। अब चीनी सेना पीएलए फिंगर 8 में जाने को तैयार हो गई है।

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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चीन टैंक और गोला-बारूद के साथ पीछे जाने को तैयार हुआ है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कोई समझौता नहीं हुआ है लेकिन भारत इसे एक ऑफर की तरह देख रहा है। जबकि अभी कुछ दूसरे इलाकों से पीछे हटने को लेकर भी बातचीत चल रही है।

सातवें दौर की वार्ता 12 अक्टूबर को हुई थी। अब तक टकराव स्थलों से सैनिकों को पीछे हटाने के मुद्दे पर कोई सफलता नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि चीन पीछे हटने को तब तैयार हुआ है जब भारत के लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन और चीन के मेजर जनरल लिउ लिन के बीच 6 नवंबर को चुशूल में बैठक हुई थी। अब तक भारत और चीन के बीच 7 राउंड में बातचीत हुई थी लेकिन इस बार बातचीत आमने-सामने हुई।

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