Friday, May 27, 2022
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BJP MLA Nitesh Rane got protection from arrest, will have to surrender rkdsnt

BJP विधायक नितेश राणे को गिरफ्तारी से मिला संरक्षण, करना होगा समर्पण

  • Updated on 1/27/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस को सिंधुदुर्ग जिले में दर्ज हत्या की कोशिश के एक मामले में भारतीय जनता पार्टी के विधायक नितेश राणे को दस दिन तक गिरफ्तार नहीं करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश राणे की अग्रिम जमानत याचिका का निस्तारण करते हुए उन्हें दस दिन के भीतर निचली अदालत में समर्पण करने का तथा नियमित जमानत के लिए याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया।

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पीठ ने आदेश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता (नितेश राणे) को सुनवाई अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत प्राप्त करने के निर्देश के साथ एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) का निस्तारण किया जाता है और 10 दिन की अवधि के लिए, उन्हें गिरफ्तारी से छूट दी जाती है।’’ पीठ में न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी हैं। 

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पीठ ने राणे की ओर से वरिष्ठ वकीलों मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा तथा राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील ए. एम. सिंघवी की दलीलें सुनीं। पीठ ने स्पष्ट किया, ‘‘हमने गुण-दोष के आधार पर कुछ भी नहीं गौर किया है।' पीठ ने कहा कि सुनवाई अदालत नियमित जमानत याचिका पर गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगी। पीठ ने शुरुआत में कहा, 'आप क्यों नहीं आत्मसमर्पण करते और नियमित जमानत के लिए अनुरोध करते हैं।' रोहतगी की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद, प्रधान न्यायाधीश ने से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'आप राज्य की ओर से पेश हो रहे हैं। यह सब क्या है, राजनीतिक वायरस।’’ 

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सिंघवी ने कहा कि यह मामला उतना आसान नहीं है, जितना रोहतगी ने पेश किया है। रोहतगी ने दलीलें शुरू करते हुए कहा कि हत्या के प्रयास का पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या किसी पेपर-कटर की वजह से लगी साधारण चोट के लिए हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जा सकता है। मैं केवल दो बातें कह रहा हूं। एक यह कि यह पेपर कटर का मामला है और दूसरा यह साधारण चोट का मामला है।’’ सिंघवी ने कहा कि आरोपियों ने मिलकर साजिश रची। 

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उल्लेखनीय है कि बंबई उच्च न्यायालय ने 17 जनवरी को मामले में नितेश राणे को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मामले की उचित जांच के बीच संतुलन की जरूरत है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने नितेश राणे और अन्य आरोपी संदेश सावंत की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन मामले के एक अन्य आरोपी मनीष दलवी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। यह मामला सिंधुदुर्ग जिला सहकारी बैंक के चुनाव के प्रचार के दौरान शिवसेना के एक स्थानीय कार्यकर्ता पर हुए कथित हमले से संबंधित है। 

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धनशोधन मामले में अनिल देशमुख ने जमानत का अनुरोध किया
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने धनशोधन से जुड़े एक मामले में जमानत के लिए बृहस्पतिवार को यहां एक विशेष अदालत में याचिका दायर की।  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता ने पहली बार नियमित जमानत याचिका दायर की है। इससे पहले, धन शोधन निवारण कानून की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका (तकनीकी आधार पर दायर) को खारिज कर दिया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशमुख को दो नवंबर, 2021 को गिरफ्तार किया था और वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी का आरोप है कि जब देशमुख मंत्री थे, उस दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने उनकी ओर से राशि एकत्र की थी और उस राशि को मुखौटा कंपनियों के जरिए उनके ट्रस्टों को भेजा गया था।

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