Friday, Apr 23, 2021
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शाहनवाज की घर वापसी या 'ऑपरेशन नीतीश' के लिये BJP ने चला नया दांव!

  • Updated on 1/16/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। कभी दिल्ली के सत्ता के गलियारें में कम उम्र में ही अपनी पहचान बना चुके और पूर्व पीएम अटल बिहारी के लाड़ले में शामिल रहे नेता शाहनवाज हुसैन को बीजेपी ने बिहार विधान परिषद का उम्मीदवार घोषित किया है। बिहार के सुपौल से तालुक्कात रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता शाहनवाज हुसैन को बिहार विधान परिषद के लिये उम्मीदवार बनाने की घोषणा से जरुर राजनीतिक पंडित भी हैरान है। वहीं समर्थक तो हतप्रभ है ही।

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शाहनवाज बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शामिल

बता दें कि शाहनवाज हुसैन उम्र के उस दौर में अटल कैबिनेट में जगह बनाने में सफल रहे जब आज मौजूदा बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल कई नेता को भी मौका नहीं मिला था। लेकिन राजनीति भी पथरीले रास्ते की तरह है। पता नहीं कौन,कब, कहां से कहां पहुंचे-इसका सही-सही अनुमान लगाना कठिन है। या यूं कहिये कि राजनीति के उस्ताद और नौसिखिये में से कब किधर से, पतली गली से कोई अर्श से फर्श या फर्श से अर्श पहुंच जाएं-यह भी तय करना आजकल के गलाकाट राजनीति में मुश्किल ही है। यह बात आजकल सौ फीसदी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल शाहनवाज हुसैन पर फिट बैठता है। 

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बिहार भेजने से समर्थक भी हैरत में

खैर शाहनवाज को विधान परिषद के लिये उम्मीदवार घोषित करने से उनके समर्थक भी हैरत में है। दरअसल उनके समर्थक यह नहीं समझ पा रहे है कि शाहनवाज को दिल्ली से बिहार विधान परिषद के लिये उम्मीदवार बनाना यह उनके लिये आखिर क्या संदेश है? गौर करने वाली बात है कि शाहनवाज हुसैन के नेतृत्व में अभी हाल ही में  जम्मू-कश्मीर में संपन्न हुए स्थानीय चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया। तो  ऐसे में लंबे काल से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से इनाम की आस देख रहे शाहनवाज को वैसे समय में बीजेपी बिहार भेज रही है जब एनडीए में अंदरखाने में खटपट जारी है। वहीं आलाकमान के आदेश के बाद ना चाहते हुए भी ना-नुक्कुर करते हुए सुशील मोदी बड़े भारी मन से पटना से दिल्ली के लिये उड़ान भर चुके है।

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सुशील मोदी का बन सकते उत्तराधिकारी

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शाहनवाज आने वाले दिनों में सुशील मोदी का विकल्प बनने के लिये भेजे गए है ताकि बिहार की एनडीए सरकार में जारी तकरार को वैसे ही खत्म कर सके जैसे कभी पूर्व डिप्टी सीएम किया करते थे? लेकिन यहां देखने वाली बात है कि सुशील मोदी के नीतीश कुमार से नजदीकियां जगजाहिर रही है, इसलिये वे हमेशा से बिहार एनडीए के लिये ट्रबलशूटर की भूमिका एक दशक से भी ज्यादा समय से निभाते रहे है। 

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बिहार एनडीए की लड़ाई सुलझाएंगे शाहनवाज

लेकिन यहीं रोल शाहनवाज भी निभाएंगे-यह उनके समर्थकों समेत बिहार एनडीए के लिये भी किसी पहेली से कम नहीं होगा। अगर वे सुशील मोदी का जगह लेंगे तो शाहनवाज का कद और धमक ही बढ़ेगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो फिलहाल शाहनवाज के लिये शीर्ष बीजेपी के नेतृत्व का संदेश साफ है। मतलब अभी फिलहाल इस नेता को घर वापसी मुहिम पर भेजा गया है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगा कि शाहनवाज को बीजेपी बिहार में मुस्लिम सीएम केंडिडेट के लिये तैयार करेगी।

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नीतीश के लिये बनेंगे चुनौती 

हालांकि इस हवा को खारिज नहीं किया जा सकता कि जदयू और बीजेपी में जिस तरह से छत्तीस का आंकड़ा हो गया ऐसे में क्या ऑपरेशन नीतीश के लिये अंतिम कील शाहनवाज साबित होंगे? यदि हां तो बीजेपी दूसरे दलों के दलबदलू विधायकों को अपने पाला में करने के लिये एक मुस्लिम सीएम का दांव फैंक सकती है जिसके लिये शाहनवाज से अच्छा चेहरा शायद ही बिहार बीजेपी के लिये हो।  

 

 

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