Sunday, Mar 29, 2020
bjp mp subramanian swamy tweet on mahatma gandhi murder

बापू की हत्या पर BJP सांसद ने उठाए सवाल, पूछा- गांधीजी के शव का क्यों नहीं हुआ पोस्टमार्टम?

  • Updated on 2/17/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की मौत को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने कई सावल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि गांधीजी के शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ था? बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार को महात्मा गांधी की हत्या की नए सिरे से जांच की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से साबित नहीं हो सका है कि बापू को नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने गोली मारी थी। 

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सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल
स्वामी ने सिलसिलेवार ट्वीट करते लिखा, 'पहला सवाल : गांधीजी के शव का कोई पोस्टमार्टम या ऑटोप्सी क्यों नहीं हुआ? दूसरा: आभा और मनु से प्रत्यक्षदर्शी के रूप में अदालत में पूछताछ क्यों नहीं की गई? तीसरा : गोडसे की रिवाल्वर में कितने खाली चैम्बर हैं? इटैलियन रिवाल्वर 'पता नहीं चला' !! क्यों? हमें इस मामले को फिर से खोलने की जरूरत है।'

Subramanian Swamy

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ट्वीट कर पूछे सवाल
अपने दूसरे ट्वीट में बीजेपी सांसद ने कहा, 'एसोसिएटेड प्रेस इंटरनेशनल जर्नलिस्ट का पेज 52 पर बयान: उसने शाम 5:05 पर चार शॉट सुने (3 नहीं, जैसा कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर (PP) ने बाद में कोर्ट में बताया)। गोडसे ने दिखाया कि उसने केवल 2 फायर किए। उसी एपीआई के पत्रकार ने कहा कि शाम 5:40 पर बिरला हाउस में गांधी को मृत घोषित किया गया था, यानी वे 35 मिनट तक जीवित थे।'

Subramanian Swamy tweet

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2019 में खारिज हुई थी याचिका
गौरतलब है कि अक्टूबर 2017 में मुंबई के रहने वाले पंकज फड़नीस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायक की थी जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या की जांच की मांग की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में खारिज कर दिया था। फड़नीस ने कई आधारों पर जांच को फिर से शुरू करने की मांग की थी, उन्होंने दावा किया था कि यह इतिहास का सबसे बड़ा कवर-अप यानी लीपापोती है। उन्होंने तीन गोलियों वाली थ्योरी पर भी सवाल उठाया था। इसी थ्योरी के आधार पर विभिन्न अदालतों ने आरोपी गोडसे और आप्टे को दोषी करार दिया था। उन्हें फांसी दे दी गई थी। जबकि विनायक दामोदर सावरकर को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ दिया गया था।

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याचिकाकर्ता ने किया था दावा
फड़नीस ने दावा किया कि दो दोषी व्यक्तियों के अलावा कोई तीसरा हमलावर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका की खुफिया एजेंसी और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की पूर्ववर्ती ऑफिस ऑफ स्ट्रेटेजिक सर्विसेस (ओएसएस) ने महात्मा गांधी को बचाने की कोशिश की थी या नहीं। बता दें कि मामले में दोषी करार दिए गए नाथूराम विनायक गोडसे और नारायण आप्टे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई थी।

महात्मा गांधी की 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में हिंदू राष्ट्रवाद के दक्षिणपंथी समर्थक गोडसे ने बेहद नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी।

 

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