Thursday, Feb 27, 2020
bjp reasons for defeat in delhi assembly elections party getting letter bomb

#BJP की हार के कारणों पर उधेड़बुन, पार्टी को मिल रहे हैं ‘लेटर-बम’

  • Updated on 2/15/2020


नई दिल्ली/निशांत राघव। विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत बढऩे के बाद भी हारने के कारणों पर शुक्रवार की सुबह प्रदेश भाजपा में शुरू हुआ बैठक का सिलसिला देर शाम तक भी पूरा नहीं हो सका। बताया जाता है कि अब समीक्षा-मंथन बैठक अगले कई दिन तक चलेगी। विस्तारकों, चुनाव में विधानसभा वार प्रभारी, सह प्रभारियों के साथ बैठक में मुख्य रूप से 11 बिंदुओं में लगभग सभी के एक समान विचार सामने आए। 

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प्रत्याशियों से मिल रहे बंद लिफाफे में हार के कारण
बताया जाता है कि आपसी द्वेष, भितरघात और पार्षदों के कार्य पर सभी ने एक सुर में अपना-अपना विरोध दर्ज कराया। सभी ने अलग-अलग मामलों में इस मुद्दे को हार की प्रमुख वजह ठहराया। जिसमें सांसदों को भी नहीं बख्शा और जमीनी स्तर पर कार्य करने का ढोंग तक करने की बात कह डाली। राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह व डा. अनिल जैन की मौजूदगी में यह बैठक संपन्न हुई। इसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी व प्रदेश के कई अन्य पदाधिकारी भी शामिल रहे। 

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समीक्षा का दौर अब कई दिनों तक रहेगा जारी
बताया जाता है कि बैठक में सबसे गौर करने वाली बात के रूप में सांसदों के जमीनी स्तर पर कार्य न करने की बात कही गई। कुछ प्रभारियों व विस्तारकों ने दो टूक कहा कि चुनाव हारने के बाद अब जनता दरबार लगाओ या फिर गली-गली में जाने का दिखावा करो, लेकिन वास्तव में पार्टी के सांसदों का जनता से जो संबंध-संवाद होना चाहिए था, उसमें बड़ा गैप दिखा। कुछ ने प्रदेश समिति और स्थानीय पदाधिकारियों के आपसी तालमेल में गहरा अभाव बताया। 

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समीक्षा बैठक के अगले चरणों में चुनाव प्रबंधन समितियों के पदाधिकारी, चुनाव लडऩे वाले सभी प्रत्याशियों, पार्षदों व अन्य पदाधिकारियों को अलग-अलग समय में बुलाया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार विस्तारकों की बैठक में अधिकतर सभी विस्तारकों की तरफ से यह बात स्पष्ट रूप से बताई गई कि प्रत्याशियों को कई बार समझाने के बाद भी वह उनकी बात को सही तरह से पालन करने के स्थान पर अपनी इच्छानुसार नीति बनाने में जुटे और बाद में उसका अधूरा क्रियान्वयन किया गया। आपसी द्वेष और भितरघात को प्रमुखता से उठाया गया। 

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टीम वर्क के लिए निर्देश होने के बाद भी अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने को आला अधिकारियों ने प्रमुखता दी, कई स्थान पर निचले कार्यकर्ताओं की बात को पूरी तरह से अनसुना कर दिया गया। अंतिम समय में प्रत्याशियों ने विस्तारकों व प्रभारियों की बात को मानना भी जरूरी नहीं समझा। बैठक में सभी ने इस बात पर  रोष जताया कि एमसीडी में भाजपा शासन होने के बाद भी पार्षदों का व्यवहार प्रत्याशियों और पार्टी की जीत में प्रमुख रोड़ा बना। लोगों में उनके प्रति नाराजगी का खामियाजा भी कई स्थान पर पार्टी को उठाना पड़ा है। इसके अलावा पार्षदों ने प्रत्याशियों की जीत में कम और अपने ऊपर अधिक ध्यान देना जरूरी समझा। 

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