Tuesday, Dec 07, 2021
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उद्धव ठाकरे ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है: भाजपा 

  • Updated on 4/5/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भाजपा ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा और कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद उन्होंने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने महाराष्ट्र के सचिन वाझे मामले और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के आरोपों का उल्लेख करते हुए पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं के समक्ष सवाल किया कि जिस मुख्यमंत्री की अगुवाई में इतनी बड़ी-बड़ी घटनाएं हो रही हैं, उनका कोई नैतिक दायित्व बनता है कि नहीं? 

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प्रसाद ने कहा कि देशमुख ने अपने इस्तीफे में जिक्र किया है कि वह नैतिक आधार पर पद से त्यागपत्र दे रहे हैं लेकिन इस पूरे प्रकरण में उद्धव ठाकरे की चुप्पी कई सवाल उठाती है। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जी आपकी कोई नैतिकता है कि नहीं? आपकी नैतिकता कहा हैं? क्या हम आपकी नैतिकता के बारे में सुनेंगे। मुख्यमंत्री जी, शासन करने का नैतिक अधिकार से अब आप वंचित हो गए हैं। लोकतंत्र लोक लाज से चलता है।’’ प्रसाद ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और उद्धव ठाकरे की सरकार दो मोर्चों पर फंसी हुई है। 

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उन्होंने कहा, ‘‘सचिन वाझे प्रकरण और दूसरा उगाही प्रकरण...इन प्रकरणों के पूरे तार को जोड़ा जाए तो यह एक बड़े लूट के षडय़ंत्र की ओर इशारा करते हैं।’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कौन किस को प्रश्रय दे रहा था, कौन किसको प्रोत्साहित कर रहा था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं? : फडणवीस 
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने राकांपा नेता अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। देशमुख ने सोमवार को राज्य के गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य भाजपा के प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि वह खुश हैं कि देशमुख ने पद छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच में कई ‘‘सनसनीखेज खुलासे’’ होंगे। बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह द्वारा देशमुख के खिलाफ लगाए गए उगाही के आरोपों की सोमवार को सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। 

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इसके बाद देशमुख ने अपना त्यागपत्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सौंप दिया जिसमें उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बाद उन्हें पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। सिंह ने 25 मार्च को आपराधिक जनहित याचिका दायर कर देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी और दावा किया था कि गृह मंत्री ने गिरफ्तार पुलिस अधिकारी सचिन वाजे सहित पुलिस अधिकारियों से बार एवं रेस्तरां से 100 करोड़ रुपये एकत्र करने के लिए कहा था। फडणवीस ने यहां संवाददाताओं से कहा कि देशमुख के इस्तीफे की उम्मीद थी और उनके पास कोई और विकल्प नहीं था। 

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भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें पहले दिन ही नैतिकता याद करनी चाहिए थी जब आरोप लगाए गए थे। फडणवीस ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं? उनकी चुप्पी बेचैन करने वाली है।’’ ठाकरे नीत शिवसेना ने 2019 में राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार बनाई थी। इस बीच चंद्रकांत पाटिल ने पुणे में संवाददाताओं से कहा कि जिन लोगों ने गलती की है उन्हें दंडित किया जाना चाहिए अन्यथा लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा। पाटिल ने कहा, ‘‘सीबीआई की 15 दिनों की प्रारंभिक जांच में कई चीजें बाहर आएंगी। देशमुख द्वारा वाजे से 100 करोड़ रुपये उगाही करने की मांग से जुड़ी सच्चाई बाहर आएगी।’’ 

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