Tuesday, Sep 28, 2021
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पाक अधिकृत कश्मीर हमेशा से हमारा रहा था, है और रहेगा : तरुण चुघ

  • Updated on 7/12/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त, 2019 को विवादित धारा 370 हटाने के बाद से भाजपा सुर्खियों में रही है। पूर्व की कांग्रेस समेत किसी भी सरकार ने इतना बड़ा कदम उठाने से गुरेज ही किया था, मगर मोदी सरकार ने एक झटके में इसे खत्म कर दिया। भाजपा की जम्मू-कश्मीर और खासकर कश्मीर घाटी को लेकर आगे क्या योजना है, इस बारे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भाजपा प्रभारी तरुण चुघ से बातचीत की ‘पंजाब केसरी ग्रुप’ के हरिश्चंद्र ने। प्रस्तुत हैं बातचीत के खास अंश :

धारा 370 हटाने के बाद भाजपा की साख में कश्मीर जैसे मुस्लिम बहुल राज्य में कितना अंतर आया है। क्या पार्टी का वहां आधार बढ़ा है?
भारतीय जनता पार्टी हिंदू-मुस्लिम की बात कभी नहीं करती। भाजपा के विषय में दूसरी पार्टियां आम जनता में भ्रम फैलाने का काम करती रही हैं। भाजपा भारतीयों की पार्टी है और हमेशा जाति-धर्म से ऊपर उठकर भारत और भारतवासियों के उत्थान के लिए काम करती है। संविधान का अस्थायी प्रावधान धारा 370 पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा फैलाया ऐसा ही एक भ्रमजाल था जिसने इस प्रदेश को विकास से कोसों दूर अंधेरे में कैद करके रखा था। हमारी सरकार ने प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानते हुए इस अस्थायी धारा को हटाकर भारत की विकासोन्मुख धारा से जोडऩे का काम किया है। इसके हटने के बाद यहां के निवासियों का भारतीय लोकतंत्र में अटूट विश्वास जगा है जिसका जीता-जागता उदाहरण डी.डी.सी. चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की तीन जगहों पर जीत है। भाजपा जनाधार बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि देशहित और जनहित में काम करती है, जनाधार स्वयं ही बढ़ जाता है।

जम्मू क्षेत्र में तो भाजपा का जनाधार रहा है, आपने बतौर प्रभारी कश्मीरी युवाओं को जोडऩे के क्या-क्या प्रयास किए?
भाजपा की रीति-नीति व नीयत सर्वविदित है। जनाधार बढ़ाना या सत्ता हथियाने के उद्देश्य से उपक्रम करना कभी भाजपा की गतिविधियों का अंग नहीं रहा है। देश और देशवासियों के विकास, सुख-समृद्धि के लिए हमारे चिंतन और कार्य निरंतर चलते रहते हैं। यही कारण है कि 2014 से पहले 70 सालों में देश जहां तक नहीं पहुंच पाया, अब मात्र 7 सालों में अपेक्षा से काफी आगे निकल गया है।अखंड ऊर्जा के धनी कश्मीर के युवाओं को शिक्षा, रहन-सहन, पोषण, तकनीकी शिक्षा, रोजगार आदि हर क्षेत्र में आगे आने का सुअवसर भाजपा और केंद्र सरकार ने दिया है। आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के युवा भी डॉक्टर, इंजीनियर, कलैक्टर, आई.ए.एस., आई.पी.एस., नेता-अभिनेता, चिंतक, विचारक व समाज सुधारक के रूप में सितारे बनकर भारत में चमकते दिखाई देंगे। हम पहले भी प्रयासरत थे, आगे भी रहेंगे।

पार्टी का पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर क्या रुख है। सत्ता में आने के बाद से भाजपा इस बारे चुप्पी साधे है, जबकि विपक्ष में रहते इस पर आक्रामक रहती थी?
यह शुरू से सुस्पष्ट तथा आईने की तरह साफ है कि पाक अधिकृत कश्मीर हमेशा से हमारा रहा था, है और रहेगा। आज तक हमारा एक भी घोषणा पत्र ऐसा नहीं रहा, जिसमें हमने इस बात को नहीं दोहराया कि पाक अधिकृत कश्मीर को हम भारत का अभिन्न अंग मानते हैं। हम सत्ता में हों या नहीं, हमने इस मुद्दे पर कभी चुप्पी नहीं साधी। हमारे गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त, 2019 को पार्लियामैंट में स्पष्ट कहा था कि जब भी मैं कश्मीर का नाम लेता हूं तो इसका अर्थ पाक अधिकृत कश्मीर के साथ है। पूरा कश्मीर हमारे भारत का अभिन्न अंग है और मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि पूरे कश्मीर के लिए मैं अपनी जान तक दे दूंगा। मतलब पाक अधिकृत कश्मीर जब तक हमारे पास वापस नहीं आ जाता हम चुप नहीं बैठेंगे। आज भी जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पाक अधिकृत कश्मीर की 24 सीटें हम खाली रखते हैं कि जैसे ही स्थितियां हमारे हक में होंगी, इन सीटों पर हमारे चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा में उपस्थित होंगे।

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का क्या बना? भाजपा इसे चुनावी मुद्दा तक बना चुकी है।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए भारत सरकार वचनबद्ध है। भाजपा वचनबद्धता में अपनी मिसाल कायम कर चुकी है। धारा 370 और 35 ए हटाने के लिए भाजपा अपने घोषणापत्रों में कहती आई थी। केंद्र में सरकार बनते ही इसे हटाया। कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास भी हमारे प्रमुख कामों में से एक है। केंद्र सरकार और भाजपा दोनों ही इसके लिए योजनाएं बना रही हैं। शीघ्र ही इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हाल ही में केंद्र ने कश्मीरी नेताओं के साथ पहली बार बैठक की थी, उसमें कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधि क्यों नहीं आमंत्रित किए गए जबकि वह भी कश्मीर का प्रमुख अंग हैं?
मोदी जी ने 24 जून को दिल्ली में ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई थी, उसमें जम्मू-कश्मीर की 8 राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों और पूर्व मुख्यमंत्रियों तथा उप मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। कश्मीरी पंडितों का विषय शुरू से भाजपा उठाती रही है, इस मुद्दे पर लड़ती रही है, हमने पहले भी यह मुद्दा उठाया था, आगे भी इंसाफ दिलाने के लिए उचित कार्य करते रहेंगे।

‘धारा 370 अब इतिहास का हिस्सा, इस पर पुनर्विचार की गलतफहमी पालना स्वयं को मुगालते में रखना है’
धारा 370 हटाने को लेकर फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती आदि कश्मीरी नेता अभी भी सहमत नहीं हैं। उन्हें उम्मीद है कि कोई नई सरकार शायद इस पर पुनर्विचार करे, सरकार ऐसे नेताओं को कैसे मनाएगी?
भाजपा का विजन एकदम स्पष्ट है कि धारा 370 संविधान की एक अस्थायी व्यवस्था थी जिसे बहुत पहले ही समाप्त कर दिया जाना चाहिए था। परंतु पूर्व सरकारों के ढुलमुल रवैये ने इसे एक नासूर बना दिया तथा जम्मू-कश्मीर को सदियों पीछे धकेल दिया। हम भारत की एकता और अखंडता के पोषक हैं। धारा 370 अब एक इतिहास बनकर रह गया है।
उम्मीदें पालना किसी का शौक हो सकता है, मगर गलतफहमी पालना स्वयं को मुगालते में रखना है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि अगर कश्मीर के लोगों को सुकून मिलता है तो पाकिस्तान के साथ भी बात करनी चाहिए, आप इस बात से कितना सहमत हैं?
कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है और हम इस पर पूरी दृढ़ता से ठोस कदमों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान का इससे दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। जहां तक कश्मीर के लोगों के सुकून की बात है उनका सुकून तो धारा 370 के हटते ही जगजाहिर हो गया। उनके उमंग और उत्साह की सीमा देखते ही बनती थी, और तो और पाक अधिकृत कश्मीर में फंसे हमारे लोग अपनी दुर्दशा पर खून के आंसू रो रहे हैं। जबसे उन्होंने कश्मीर में मोदी के विकास की कहानियां सुनी हैं वे भारत के प्रधानमंत्री की तरफ आशा की निगाहों से देख रहे हैं कि कब पाक अधिकृत कश्मीर पर उनकी नजरें इनायत होंगी।

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