Tuesday, Dec 07, 2021
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कोरोना के बीच देश में ब्लैक फंगस का आतंक, हरियाणा में अधिसूचित रोग घोषित

  • Updated on 5/15/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच देश में ब्लैक फंगस (Black Fungus) ने कहर मचा दिया है। भारत में लगातार ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने ब्लैक फंगस को हरियाणा में अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है।

विज ने शनिवार को कहा कि ब्लैक फंगस को हरियाणा में अधिसूचित रोग घोषित कर दिया गया है। इसके तहत किसी भी सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल में अगर ब्लैक फंगस का कोई मामला आता है तो सीएमओ को उसकी जानकारी देना अनिर्वाय होगा।

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महाराष्ट्र में इससे अब तक 52 लोगों की मौत
इसके साथ हीं महाराष्ट्र में इसके 2 हजार से ज्यादा मरीज पाए गए हैं। महाराष्ट्र में इससे अब तक 52 लोगों की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश, गुजरात समेत कई राज्यों में इसके मरीज सामने आ रहे हैं। वहीं अब राजधानी दिल्ली में भी इसके मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। दिल्ली के एम्स और सर गंगाराम अस्पताल में ब्लैक फंगस के कुल 29 मरीज भर्ती हैं।

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बीमारी के ये है लक्षण 
बता दें कि ब्लैक फंगस म्यूकॉर्माइसेट्स नामक मोल्ड्स के एक समूह के कारण होता है। जो पूरे प्राकृतिक वातावरण में पाए जाते हैं। यह अक्सर साइनस, फेफड़े, त्वचा और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यह मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो अन्य बीमारियों के लिए दवा ले रहे हैं। ये फंगस विशेष रूप से शुगर के मरीजों को अधिक प्रभावित करता है।

पहले से किसी अन्य बीमारी के कारण दवा ले रहे मरीजों में पर्यावरणीय रोगजनकों से लड़ने की उनकी क्षमता कम होती है। ऐसे व्यक्तियों के साइनस या फेफड़े हवा के जरिए फंगल बीजाणुओं के अंदर जाने के बाद प्रभावित हो जाते हैं। इसके लक्षणों में मुख्यत:बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस फूलना, खून की उल्टी और बदली हुई मानसिक स्थिति शामिल हैं।

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कोरोना मरीजों को ज्यादा प्रभावित क्यों कर रहा ब्लैक फंगस
जिन लोगों का शुगर कंट्रोल से बाहर होता है ऐसे कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस के संक्रमण का अधिक जोखिम होता है।  ऐसे मरीजों का इलाज स्टेरॉयड के जरिए किया जाता है, जो आगे रोगप्रतिरोधक क्षमता से समझौता करता है। भारत में डॉक्टरों का मानना ​​है कि स्टेरॉयड जो गंभीर और गंभीर रूप से बीमार कोविड -19 रोगियों के लिए जीवन रक्षक उपचार के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं, म्यूकोर्मिकोसिस के लिए ट्रिगर साबित हो सकते हैं।

स्टेरॉयड फेफड़ों में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, ये प्रतिरक्षा को कम कर सकते हैं और शुगर रोगियों और गैर-मधुमेह कोविड -19 रोगियों दोनों में समान रूप से ब्लग शुगर के स्तर को बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक आईसीयू में रहने वाले मरीजों को भी ब्लैक फंगस का खतरा अधिक होता है।

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