Sunday, Jun 16, 2019

आईकार्ड को तरसे पंचायत प्रतिनिधि, तीन साल में भी नहीं बन पाए ब्लॅाक प्रमुखों के आईकार्ड

  • Updated on 5/18/2019

देहरादून/ ब्यूरो। एक ओर पंचायतों को सशक्त कर देश को मजबूत किए जाने के दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर सरकार पंचायत प्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा कर रही है। ब्लॉक प्रमुख संगठन की मांग पर तीन साल पहले एक शासनादेश जारी हुआ जिसमें कहा गया कि सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को पहचान पत्र (आईकार्ड) जारी करेगी ताकि उन्हें जनहित के कामों के लिए सचिवालय और विधानसभा में प्रवेश में दिक्कत न हो। तीन साल बीतने के बाद भी ये आईकार्ड नहीं बन पाए हैं।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि उन्हें सरकार की ओर से ऐसा पहचान पत्र जारी किया जाए, जिससे उन्हें विधानसभा और सचिवालय गेट पर प्रवेश के दौरान रोका-टोका न जाए। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के सहमति पर वर्ष 2016 में इस सम्बंध में एक शासनादेश जारी हुआ।

शासनादेश के कुछ महीनों बाद मई 2017 में सभी जिला पंचायत अध्यक्षों व ब्लॅाक प्रमुखों को सचिवालय प्रशासन की ओर से एक प्रपत्र पंचायती राज विभाग के मार्फत भेजा गया, जिसमें उनके बारे में विस्तार से जानकारी मांगी गई ताकि सरकार की ओर से उनका पहचान पत्र जारी हो सके। सभी पंचायत प्रतिनिधियों ने यह प्रपत्र भरकर पंचायतीराज विभाग के जरिए सचिवालय प्रशासन को भेजा लेकिन उसके बाद यह कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

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‘राज्य सरकार पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। आईकार्ड जैसी एक छोटी से मांग शासनादेश होने के बावजूद पूरी न होना, सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये को दर्शाता है। इसमें ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है’।

- प्रकाश रावत, ब्लॉक प्रमुख जोशीमठ।

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‘मैं पिछले दो वर्ष से पंचायतीराज निदेशक का पदभार संभाले हुए हूं। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हो सकता है मामला ग्राम्य विकास विभाग से जुड़ा हो। यदि मुझे विस्तृत जानकारी मिले तो कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाएगा’।

- हरीश चन्द्र सेमवाल, निदेशक पंचायतीराज विभाग।

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