Monday, Aug 02, 2021
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जांच एजेंसी को सलाह देना क्या मीडिया का काम है- बॉम्बे हाईकोर्ट

  • Updated on 10/9/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay high court) ने बीते बृहस्पतिवार को एक सवाल करके हुए पूछा की क्या किसी जांच एजेंसी को किस तरह से जांच करनी चाहिए ये सालह देना मीडिया का काम है? चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जी एस कुलकर्णी की बेंच ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant singh rajput) की मौत के मामले में मीडिया ट्रायल (Media trial) के विरोध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह प्रश्न उठाया। 

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एजेंसी को परामर्श देना मीडिया का काम है?
कोर्ट ने कहा, 'क्या जांच एजेंसी को परामर्श देना मीडिया का काम है? उन्होंने कहा यह काम जांच अधिकारी का है।' मामले में प्रतिवादी बनाये गये एक न्यूज चैनल की वकील मालविका त्रिवेदी ने जनहित याचिकाओं का विरोध किया जिसके बाद न्यायाधीशों ने यह टिप्पणी की। त्रिवेदी ने जनहित याचिकाएं दाखिल करने को लेकर वकील आस्पी चिनॉय की दलीलों का विरोध किया।

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याचिक में लगाया ये आरोप
दरअसल, ये जनहित याचिकाएं पूर्व पुलिस अधिकारियों के एक समूह की ओर से दाखिल की गईं थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राजपूत मामले में मीडिया ने मुंबई पुलिस की छवि खराब करने का काम किया है। इस मामले में जवाब देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि रिपोर्टिंग करने पर किसी भी प्रकार की रोक का आदेश नहीं दिया जा सकता।

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वकील मालविका त्रिवेदी ने कही ये बात
त्रिवेदी ने कहा, 'मीडिया की भूमिका पर संरचनात्मक सीमा रेखा कैसे खींची जा सकती है। हाथरस मामले का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने कहा, क्या इस मामले में मीडिया की भूमिका अहम नहीं है?' इस मामले पर बेंच ने कहा कि याचिका किसी आदेश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि यह केवल जिम्मेदारपूर्ण पत्रकारिता को लेकर है। फिलहाल, कोर्ट ने इस मामले में सोमवार तक केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

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