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bombay hc asks central govt what is the mechanism for action on channels sohsnt

बॉम्बे HC ने केंद्र से पूछा- चैनलों पर कार्रवाई के लिए क्या है व्यवस्था

  • Updated on 10/17/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में इन दिनों न्यूज चैनलों के कार्यक्रमों का मुद्दा जोरों पर है। ऐसे में बॉम्बें हाईकोर्ट (Bombay high court) ने बीते शुक्रवार को न्यूज चैनलों के मुद्दे पर केंद्र सरकार (Central Govt) से पूछा कि क्या चैनलों पर दिखाने जाने वाले कार्यक्रम से किसी को नुकसान पहुंचने से पहले ही जांच करने की कोई व्यवस्था है?  इसके साथ ही कोर्ट ने पूछा कि यदि मीडिया नियमों का उल्लंघन करता है तब सरकार व संसद की जिम्मेदारी हो जाती है कि वे इस संबंध में उचित कार्रवाई करें।

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मीडिया ट्रॉयल पर रोक लगाने की मांग
बॉम्बे हाईकोर्ट इन दिनों एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित प्रोग्राम दिखाए जाने को लेकर दाखिल की गईं याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। ये याचिकाएं पूर्व आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ अन्य नामी हस्तियों ने दाखिल की हैं। इनमें सुशांत मामले पर मीडिया ट्रॉयल पर रोक लगाने की मांग गई गई है। इस दौरान कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश गिरीश कुलकर्णी की बेंच ने कहा कि यदि सरकारी अधिकारी को किसी जुर्म में हटाया जा सकता है तो निजी कर्मचारियों पर भी यही नियम लागू होता है।

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कोर्ट ने मांगा केद्र से जवाब
बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, प्रिंट मीडिया के मामले में सरकार के पास सेंसर की व्यवस्था है, लेकिन यहीं व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को क्यों नहीं है। बेंच ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा ऐला मालूम होता है कि आप (सरकार) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर लगाम कसने के पक्ष में नहीं हैं। 

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वेंच द्वारा सेंसर व्यवस्था को लेकर किए गए सवालों का जवाब देते हुए एडिशनल सलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से प्रेस की स्वतंत्रता में दखल ने देने के निर्देश जारी किए हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार का कदम उठाना कोर्ट के नियमों का उल्लंगन होगा।  सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, शीर्ष अदालत ने सरकार को कहा है कि वह प्रेस को ही आत्म नियमन के लिए प्रोत्साहित करे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ऐसी स्थिति में कार्रवाई को लेकर भी वैधानिक व्यवस्था बनाई है।

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कोर्ट के सवालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, अगर कोई भी चैनल नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो शिकायत मिलने के बाद नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन को भेजा जाता है। यदि इस दिशा में एनबीए की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की जाती तो सरकार दखल देती है और कार्रवाई करती है। बेंच ने आगे कहा कि मीडिया को ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बेकार में कलंकित न किया जाए।

 

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