Tuesday, Oct 26, 2021
-->
book-escape-from-pakistan-on-former-commander-jack-shay-released

पूर्व कमांडर जैक शे पर आधारित पुस्तक इस्केप फ्रॉम पाकिस्तान का हुआ विमोचन

  • Updated on 10/12/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मार्च 1965 में मेरे पिता काराची पाकिस्तान में एक मिशन पर भेजे गए। लेकिन अगस्त 1965 में दोनों देशों के बीच टकराव होने से स्थितियां उलट गईं। काराची में हमें नजरबंद कर दिया गया। हमारे कंपाउंड में 50-60 सिपाही अंदर आ गए हमें सेना द्वारा बनाए बंकर्स में ले जाया गया जहां हमें काफी लंबे समय तक बैठना पड़ा। लेकिन हर परिस्थति में जो एक आदमी मेरे साथ खड़ा था वो थे मेरे पिता कमांडर जैक शे जिन्होंने कहा था देबा वी ब्रेव।

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि, जानें उनके महान लेख

यह बात कमांडर जैक शे की बेटी देबोरा एन शे ने अपने पिता के ऊपर लिखी किताब इस्केप फ्रॉम पाकिस्तान के विमोचन के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि हमें काराची में कई रातें भूखा रहकर गुजारनी पड़ीं। जब मेरे पिता एक बार शौच के लिए गए तो उन्हें 4 लोगों ने मार-पीट कर टेरेस से नीचे फेंक दिया। जिसके बाद उन्हें काराची अस्पताल ले जाया गया। जहां लंबे समय तक चले इलाज के बाद वह पैरों पर चलने में सक्षम हुए। वो हमेशा मुस्कुराते रहे। जब वह भारत लौटे तो उन्हें देश के राष्ट्रपति ने अति विशिष्ट सेवा मेडल और बार पुरस्कार प्रदान किए। इसके साथ ही उन्हें 11वें डेस्ट्रोयर स्क्वार्डन में आईएनएस राणा, आईएनएस राजपूत और आईएनएस रंजीत का कैप्टन बनाया गया।

जल्द शंकर को मिलेगा जीवनसाथी

देश के बहादुर अधिकारियों में से एक थे जैक शे : प्रेमवीर दास
इस मौके पर तीन मूर्ति स्थित नेहरू मेमोरियल में उनके साथ काम करने वाले तमाम जल सेना अधिकारियों को आमंत्रित किया गया। विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि वाइस एडमिनरल प्रेमवीर दास ने कहा कि 1962 में मुझे एक पत्र मिला कि जोकि इस समय जल सेना के डिप्टी डायरेक्टर पर्सनल जैक शे द्वारा हस्ताक्षरित था। जैक शे देश के बहादुर अधिकारियों में से एक थे। देबोरा ने किताब में एक सच्ची घटना लिखी है जोकि उनके पिता कमांडर जैक शे को उनकी श्रद्धांजलि है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.