Sunday, Nov 28, 2021
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Brazil suspends agreement with Bharat Biotech decision taken after allegations prshnt

ब्राजील ने भारत बायोटेक के साथ निलंबित किया करार, भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद लिया फैसला

  • Updated on 6/30/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके कोवैक्सीन की दो करोड़ खुराकें खरीदने पर सहमत हुई ब्राजील की सरकार ने समझौते में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद करार को निलंबित करने की बुधवार को घोषणा की। ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्री मार्सेलो क्विरोगा ने ट्वीट किया, सीजीयूऑनलाइन की अनुशंसा पर हमने कोवैक्सीन करार को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, सीजीयू के प्रारंभिक विश्लेषण के मुताबिक, करार में कोई अनियमितता नहीं हैं लेकिन अनुपालन के कारण, मंत्रालय ने और विश्लेषण के लिए करार को रोकने का फैसला किया है।

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दक्षिण अमेरिकी देशों ने शुरू की थी टिके की जांच
ब्राजील के साथ कोवैक्सीन करार उस वक्त विवादों में घिर गया जब दक्षिण अमेरिकी देशों के अटॉर्नी जनरल ने सौदे में जांच शुरू कर दी। क्विरोगा ने एक अन्य ट्वीट में कहा, यह गौर करने लायक है कि ब्राजील सरकार ने कोवैक्सीन टीके के लिए एक पाई का भी भुगतान नहीं किया था। उन्होंने कहा, च्च्यह कदम ब्राजील में कोविड 19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान की गति के साथ समझौता नहीं करेगा, चूंकि टीकाकरण एजेंट के आपातकालीन या निश्चित उपयोग के लिए अन्विसा (ब्राजील की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामक एजेंसी) से कोई मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि, भारतीय दवा निर्माता (भारत बायोटेक) से तत्काल इस पर कोई टिप्पणी नहीं मिल पाई है। 

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अल्फा और डेल्टा स्वरूपों पर भी है प्रभावी
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) ने कहा है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से भारत बॉयोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सीन कोरोना वायरस के अल्फा और डेल्टा स्वरूपों को प्रभावी तरीके से बेअसर करती है।

एनआईएच ने कहा कि कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों के रक्त सीरम के दो अध्ययनों के परिणाम बताते हैं कि यह टीका ऐसे एंटीबॉडी विकसित करता है, जो सार्स-सीओवी-2 के बी.1.1.7 (अल्फा) और बी.1.617 (डेल्टा) स्वरूपों को प्रभावी तरीके से बेअसर करते हैं, ये स्वरूप सबसे पहले क्रमश: ब्रिटेन और भारत में पाए गए थे। 

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प्रभावशाली कोवैक्सीन की सफलता में योगदान
शीर्ष अमेरिकी स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान ने कहा कि उसकी वित्तीय मदद से विकसित एक सहायक औषधि ने अत्यधिक प्रभावशाली कोवैक्सीन की सफलता में योगदान दिया है, जिसे भारत एवं अन्य स्थानों में अब तक लगभग दो करोड़ 50 लाख लोगों को लगाया जा चुका है। सहायक औषधियां प्रतिरक्षा क्षमता और टीके की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए उसके हिस्से के रूप में तैयार की जाती हैं।

एनआईएच ने बताया कि कोवैक्सीन में सार्स-सीओवी-2 के एक अक्षम रूप को शामिल किया गया है जो अपनी प्रति नहीं बना सकता, लेकिन वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है। उसने कहा कि टीके के दूसरे चरण के परीक्षण के प्रकाशित परिणाम बताते हैं कि यह सुरक्षित है। उसने बताया कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण के सुरक्षा संबंधी आंकड़े इस साल के अंत में उपलब्ध हो जाएंगे।

 

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