Sunday, Jun 13, 2021
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BRICS देशों में होगा एक-दूसरे की संप्रभुता का आदर करने का समझौता, बैठक में मिली ड्राफ्ट को मंजूरी

  • Updated on 9/18/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव के बीच बीते बृहस्पतिवार को पांच देशों के समूह ब्रिक्स (Brics) के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की एक ऑनलाइन बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता रूस (Russia) द्वारा की गई। ब्रिक्स संगठन में रूस के एक अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा के अलावा आतंकवाद और चरमपंथ पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

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सुरक्षा मुद्दों पर वार्ता बढ़ाने को लेकर हुआ समझोता
अधिकारी ने बताया कि सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच करीबी समन्वय पर एक समझौता किया गया।इसके अलावा बैठक में चीन एक समझौता करने जा रहा है जिसमें दोनों देशों की संप्रभुता के पालन का वादा होगा। बैठक के दौरान ब्रिक्स के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच हुई बैठक में इस समझौते के प्रारुप को स्वीकृति दी गई। मालूम हो कि भारत की ओर से इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल भी शामिल हुए, वहीं चीन की ओर से कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता यांग यिची शामिल हुए। 

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वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर हुआ ये अहम फैसला

ब्रिक्स देशों की इस बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सख्त कदम उठाने व आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर एक समझौता होगा। सभी देशों ने मिलकर इसके लिए आतंकवाद रोधी रणनीति का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट को भारत-चीन के बीच जारी तनाव को लेकर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ड्राफ्ट में सभी को एक-दूसरे की संप्रभुता का ध्यान रखना और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी नहीं करने का वादा शामिल है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की बात कही गई है। ब्रिक्स देशों की शिखर बैठक में इसे मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

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10वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक
दरअसल, रूस की अध्यक्षता में ये 10वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक आयोजित की गई। रूस के एक अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा के अलावा आतंकवाद और चरमपंथ पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया, हालांकि भारत और चीन की ओर से सीमा विवाद को लेकर पहले ही कई मौकों पर स्पष्ट कर दिया गया है कि वे किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं चाहते है। वहीं रूस का इस मुद्दे पर कहना है कि दोनों देश आपस में बैठक के जरिए मतभेदों का समाधान निकाल सकते हैं।

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