दीन के बंधु, किसान के मसीहा-छोटू राम

  • Updated on 11/24/2018

दीनबंधु चौधरी छोटू राम का सफर सदा ऊंचे पहाड़ों तथा गहरी खाइयों की तरह मुश्किलों से भरा रहा लेकिन उनका लक्ष्य किरदार और अकीदे पर सदा अडिग रहा :

असफलताओं, मुश्किलों से मत घबरा मेरे दोस्त।
गुच्छे की आखिरी ताली भी ताला खोल सकती है॥

इन्होंने इस वाक्य को बार-बार सिद्ध कर दिखाया, कभी डरे नहीं और जब जो ठाना, मंजिल की ओर अपनी धुन में अग्रसर रहे। जहां अपने समाचार पत्र ‘जाट गजट’ में 1916 में गुडग़ांव के डिप्टी कमिश्नर के विरुद्ध छापे लेख के लिए अंगे्रज अफसर ने उन्हें ‘देश निकाला’ के आदेश दे दिए, वहीं उसी सरकार ने 1927 में राय बहादुर का खिताब दिया और 1937 में सर छोटू राम की उपाधि से विभूषित हुए। 

वर्ष 1920 में गांधी जी द्वारा आंदोलन वापसी से रुष्ट होकर कांग्रेस से नाता तोड़ा व 1923 में युनिनिस्ट पार्टी का गठन किया।  जमींदार लीग के बैनर तले फजल हुसैन के साथ मिलकर प्रचार-प्रसार किया और वर्ष 1937 में युनिनिस्ट पार्टी पंजाब में जीती और यहां उनका डोगरी बैल्ट से विशेष स्नेह जगजाहिर हुआ। डोगरा क्षेत्र के सर सिकंदर हयात खान को मुख्यमंत्री बनवा खुद राजस्व मंत्री बने। 

वर्ष 1938 में मार्कीटिंग बोर्ड का गठन किया ताकि किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम मिल सके। यह बोर्ड आज पूरे देश में विद्यमान है। किसान सदा सर छोटू राम का ऋणी रहेगा।

दीनबंधु का जन्म 24 नवम्बर 1881 को रोहतक के गढ़ी सांपला में हुआ। किसान सदा गर्ज, मर्ज तथा कर्ज में आकंठ डूबा रहता है और यही उनके पिता जी के साथ भी हुआ।

गांव के ही साहूकार द्वारा उनकी बेइज्जती उनके बाल मन पर अमिट छाप छोड़ गई और रिछपाल से छोटू बने बच्चे का संकल्प परवान चढ़ा और वह दीन बंधु, किसान मसीहा, राय बहादुर तथा सर छोटू राम की सीढिय़ां चढ़ते हुए इतिहास के सुनहरी पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा गए।

राष्ट्रीय परियोजनाओं में भाखड़ा नंगल डैम की प्रस्तावना का स्वरूप और उसका क्रियान्वयन चौधरी छोटूराम की सबसे बड़ी देन है।                                                                                                              ---डा. महेन्द्र सिंह मलिक

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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