सपा-सपा गठबंधन के सामने हैं कई मुश्किलें, कहीं दूर ना हो जाए OBC वोट बैंक

  • Updated on 1/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक उठा- पटक शुरू हो गई है और हमेशा की तरह इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखा जा रहा है। जहां एक और बसपा और सपा ने अपनी 25 ,साल पुरानी दुश्मनी भूल कर एक साथ आ गए हैं, वहीं बिहार के पूर्व- उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की और उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। तेजस्वी ने सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की है।  

गठबंधन के सामने भी ओबीसी वोट की समस्या 
एसपी- बसपा गठबंधन तो हो गया है लेकिन अब ओबीसी वोट बैंक की लड़ाई दिलचस्प होेने वाली है। दरअसल उत्तर प्रदेश में जितनी भी छोटी पार्टियां है वो सभी पार्टियां इसी वोट बैंक की राजनीति कर रही है। इस गठबंधन में किसी छोटी पार्टी को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में ये देखना बहुत दिलचस्प होने वाले है कि छोटे दल किधर जाते हैं।

बीजेपी के खिलाफ खड़े हैं अपने

उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियों की हमेशा से नजर ओबीसी वोट बैंक पर रही है। इस बार सपा- बसपा के गठबंधन से ये वोट बैंक और भी अहम हो गया है। भाजपा पिछला चुनाव अपना दल सोने लाल के साथ मिलकर लड़ी थी। विधानसभा चुनाव में सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी भी साथ आ गई थी।

ये दोनों अभी भी भाजपा के साथ है लेकिन लगातार सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाकर दबाव बनाए हुए हैं। भाजपा के सामने इनको अपने साथ रखने और दूसरी ऐसी ही पार्टियों को साथ लने की भी चुनौती है। 

गठबंधन के सामने भी कई बड़ी समस्या 
आरएलडी को भी इस गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है जबकि पश्चिमी यूपी में उसका काफी प्रभाव है। इसके अलावा निषाद पार्टी और पीस पार्टी भी गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है। बताते चलें कि गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में गठबंधन ने इनके समर्थन से ही जीत हासिल की थी। एसपी भी खुद हमेशा से ओबीसी वोट बैंक की राजनीति करती आई है। ऐसे में ओबीसी का प्रतिनिधित्व करने वाली सभी छोटी पार्टियां के बिना वह कितना वोट अपने साथ ला पाती है यह बड़ा सवाल है। गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी गैर यादव ओबीसी को अपने साथ लाने की चुनौती। जबकि प्रएसपी प्रमुख शिवपाल यादव एसपी के परंपरागत यादव वोट बैंक में सेध लगाने को तैयार है।

 कांग्रेस के लिए भी बड़ी चुनौती 

राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस ने इस बार उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अब कांग्रेस को सपा बसपा गठबंधन में जगह नहीं मिली है तो ऐसे में कांग्रेस छोटे दलों के साथ जा सकती है। अगर ये सारे छोटे दल कांग्रेस के साथ आ गए तो कांग्रेस तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत का फायदा उठाकर यूपी में पहले से कुछ बेहतर कर सकती है। यहां भी सवाल यही है कि क्या कांग्रेस ओबीसी का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दलों को अपने साथ ला पाएगी। ये कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी चुनौती होने वाली है। 

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